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Criminal law: ओवैसी बोले- नए विधेयक लोगों के लिए खतरा; पुलिस को देते हैं जस्टिस, जूरी और एक्जिक्यूटर की ताकत

Wed, 20 Dec 2023 03:46 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ओवैसी ने कहा कि बीएनएस में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं जो बहुत खतरनाक हैं। ये नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए खतरा हैं।
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लोकसभा में बहस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी
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विस्तार
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आपराधिक कानून संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर बुधवार को लोकसभा में बहस की गई। ये तीनों बिल भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। इस विधेयक में ट्रायल कोर्ट को अधिकतम तीन सालों में अनिवार्य रूप से निर्णय देने का प्रावधान किया गया है। हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इन विधेयकों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक विधेयक लोगों की नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए खतरा हैं क्योंकि वे पुलिस को किसी के भी खिलाफ कार्रवाई करने की व्यापक शक्तियां देते हैं।

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लोगों से छीन लिए जाएंगे उनके अधिकार- ओवैसी
लोकसभा में इन विधेयकों पर चल रही बहस में हिस्सा लेते हुए ओवैसी ने कहा कि ये विधेयक देश के आम लोगों के खिलाफ हैं। इसके कानून बनने के बाद लोगों से उनके अधिकार छीन लिए जाएंगे। ओवैसी ने आगे कहा कि बीएनएस में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं जो बहुत खतरनाक हैं। ये नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए खतरा हैं। इसमें पुलिस को 'न्यायाधीश, जूरी और एक्जिक्यूटर' के रूप में काम करने की शक्तियां भी दे दी गई हैं। इतना ही नहीं, लोकसभा में पेश किए गए विधेयकों में राजद्रोह के अपराध को एक अलग अवतार में पेश किया गया है। साथ ही न्यूनतम सजा को भी तीन साल से बढ़ाकर सात साल कर दिया गया है।

कल अमित शाह ने निम्न सदन में पेश किए थे बिल
गौरतलब है कि दो तिहाई विपक्ष की अनुपस्थिति में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने आपराधिक कानून संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक (बीएसबी) को लोकसभा में पेश किए थे। ये तीनों बिल भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। बुधवार को इन पर बहस की गई। 
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हुए हैं अहम बदलाव
तीनों विधेयकों में आपराधिक कानून में अहम बदलाव हुए हैं। इनके कानून बनने के बाद भीड़ हिंसा के आरोपियों को उम्र कैद की सजा मिलेगी। पहले सात वर्ष की सजा का प्रावधान था। आर्थिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाना आतंकी गतिविधियों के दायरे में आएगा। तस्करी या नकली नोटों का उत्पादन, देश में रक्षा या विदेश में सरकारी संपत्ति को क्षति, सरकार को मजबूर करने के लिए किसी का अपहरण आतंकी कृत्य माना जाएगा।

छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा
ऐसे छोटे अपराध जिससे समाज पर व्यापक प्रतिकूल असर नहीं पड़ता हो, इसके लिए विधेयक में जेल की जगह सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान है। छोटी-मोटी चोरी, नशे में धुत होकर परेशान करना व अन्य अपराधों के मामले में जेल की सजा खत्म कर दी गई है। इसके तहत दोषी व्यक्ति को सामुदायिक सेवा करनी होगी और इसके लिए उसे किसी तरह का आर्थिक भुगतान नहीं किया जाएगा। विधेयक में सामुदायिक सेवा को नए सिरे से परिभाषित भी किया गया है।

दुष्कर्म के मामले में खास प्रावधान
दुष्कर्म के मामले में अदालती कार्यवाही के संबंध में कोर्ट की अनुमति के बिना कुछ भी प्रकाशित करना प्रतिबंधित होगा। इसका उल्लंघन करने पर दो साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

कानूनों में अहम बदलाव

  • विधेयक के कानूनी जामा पहनने के बाद आईपीसी में 511 की जगह 356 धाराएं रह जाएंगी। भारतीय न्याय संहिता लागू होने से 175 बदल जाएंगी।
  • भारतीय न्याय संहिता में 8 नई धाराएं जुड़ेंगी, 22 धाराएं आई गई हैं। ऐसे में सीआरपीसी में 533 धाराएं रह जाएंगी।
  • सीआरपीसी में 160 धाराएं बदलेंगी, नौ नई धाराएं जुड़ेंगी।
  • सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेंस के जरिये पूछताछ की अनुमति मिलेगी।
  • ट्रायल कोर्ट को अधिकतम तीन साल के भीतर अनिवार्य रूप से देना होगा फैसला। इस समय  4.44 करोड़ मामले निचली अदालतों  में लंबित हैं, इनका निस्तारण तेजी से होगा।
  • आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट बदले जाएंगे। 
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