जानकारी के अनुसार देश के सरकारी अस्पतालों में 30, प्राइवेट में 23.1, प्राइवेट डॉक्टर या क्लीनिक में 42.5 और ट्रस्ट के अस्पताल में 1.1 फीसदी मरीजों को उपचार मिल रहा है। देश में सर्वाधिक 31.4 फीसदी मरीजों को संक्रमण के चलते भर्ती होना पड़ रहा है। जबकि 11.2 फीसदी घायल होने के बाद और 9.9 फीसदी मरीज पेट से जुड़ी परेशानियों के चलते अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
सरकारी अस्पताल में भर्ती एक मरीज के उपचार पर 4,452 रुपये का खर्चा आ रहा है। जबकि प्राइवेट अस्पताल में करीब 31,845 रुपये है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर कोई मरीज कैंसर से पीड़ित है तो सरकारी अस्पताल में चिकित्सीय व्यय 22,520 रुपये है जबकि प्राइवेट अस्पताल में ये 93,305 रुपये तक है। प्राइवेट अस्पताल के इस खर्च में डॉक्टर की फीस से लेकर बेड इत्यादि के चॉर्ज तक शामिल हैं।
एलोपैथी-आयुष ओपीडी का अतंर
रिपोर्ट में ओपीडी सेवाओं का भी जिक्र किया गया है। शहरी क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में मरीज पर एलोपैथी की ओपीडी पर प्रति मरीज 343 रुपये और आयुर्वेद के लिए 483 रुपये का खर्च आता है। प्राइवेट अस्पताल की बात करें तो एलोपैथी के लिए 1,036 और आयुर्वेद ओपीडी में प्रति मरीज 1,010 रुपये का खर्चा आता है। जबकि इन्हीं अस्पतालों की होम्यिपैथी ओपीडी में 1603 और योग व नेचुरोपैथी के लिए मरीज को 461 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन केस
सर्व रिपोर्ट में विभाग ने देश भर के अस्पतालों और नर्सिंग होम में प्रसूति को लेकर भी डाटा तैयार किया है जिसके अनुसार सरकारी अस्पतालों में 34.9 फीसदी सिजेरियन केस हैं, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 62.7 फीसदी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी कराई जा रही है। इनके अलावा रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के नवजात शिशुओं के टीकाकरण और उसे लेकर आने वाले खर्च का ब्यौरा भी है।