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हाईकोर्ट के आदेश के दस साल बाद भी विशेष बच्चों से नहीं हो रहा न्याय

Fri, 03 Jan 2020 12:31 AM IST
संजीव कुमार झा अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली के 4008 स्कूलों में अब तक प्राइमरी स्तर पर विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं  
  • आयुक्त निःशक्त जन ने सभी स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के दिए आदेश
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 2009 में एक आदेश देते हुए राजधानी के सभी स्कूलों में दो 'स्पेशल एजूकेटर' रखना अनिवार्य कर दिया था। लेकिन कोर्ट के आदेश के दस साल बीत जाने के बाद भी इस आदेश पर पूरी तरह अमल नहीं हो रहा है। केवल प्राइवेट स्कूलों में ही नहीं, दिल्ली सरकार और नगर निगमों के स्कूलों में भी इस आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है।

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आयुक्त निःशक्त जन कार्यालय के समक्ष इस मामले में हुई एक सुनवाई के बाद आयुक्त निःशक्त जन टीडी धारीवाल ने सभी स्कूलों में दो विशेष शिक्षकों को नियुक्त करने का आदेश दिया है। आयुक्त ने अपने आदेश में कहा है कि शेष सभी अध्यापकों को भी एक लघु प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत विशेष बच्चों की जरुरतों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाया जाए।

अभी तक की स्थिति में स्कूलों में माध्यमिक स्तर और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है, लेकिन प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के लिए ऐसे शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है।
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दरअसल, रेशमा परवीन नामक एक दिव्यांग महिला ने निःशक्त जन आयुक्त कार्यालय के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि दिल्ली के स्कूलों में 'स्पेशल एजूकेटर (प्राइमरी)' का अभी तक पद ही सृजित नहीं किया गया है।

यही कारण है कि प्राइमरी के स्तर पर स्कूलों में विशेष बच्चों को सामान्य शिक्षकों के जरिए पढ़ाया जा रहा है। जबकि समावेशी शिक्षा के तहत तय किए गए लक्ष्यों के मुताबिक विशेष बच्चों को भी सामान्य स्कूलों में विशेष अध्यापकों के जरिए पढ़ाया जाए जिससे उनका समग्र विकास संभव हो सके।

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क्या कर रहे हैं स्कूल

रेशमा परवीन ने शिक्षा विभाग से एक आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में विभाग ने स्पष्ट किया था कि स्पेशल एजूकेटर प्राइमरी के स्तर पर कोई पद सृजित नहीं किया गया है।

सभी उच्च स्कूलों में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विशेष प्रशिक्षक नियुक्त किए जाते हैं जिनके माध्यम से सभी विशेष बच्चों को पढ़ाया जाता है। लेकिन ऐसे शिक्षक प्राइमरी के बच्चों को कोई शिक्षण नहीं देते जिससे उनके विकास की संभावनाएं कम हो रही हैं।  

दिल्ली में लगभग 4008 स्कूलों में अभी तक प्राइमरी स्तर पर कोई विशेष प्रशिक्षक नियुक्त नहीं है। निःशक्त जन आयुक्त कार्यालय को दी गई जानकारी में कई संस्थानों ने बताया है कि उनके यहां माध्यमिक स्तर और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विशेष शिक्षक नियुक्त किए गए हैं।

क्या कहा आरसीआई ने

दि्व्यांग लोगों की शिक्षा के नियमन से जुड़ी संस्था रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) ने कहा है कि सभी विशेष बच्चों के लिए नियम के मुताबिक विशेष शिक्षक उपलब्ध करवाना अनिवार्य है।

संस्था की कानूनी सलाहकार अनुजा सक्सेना ने अमर उजाला से कहा कि उनकी कोशिश होती है कि बच्चों के समग्र विकास के लिए सभी बच्चों को विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। बच्चों की आवश्यकता को देखते हुए अलग-अलग प्रकार के विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए भी उचित उपाय किये जाने चाहिए।  
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