रेशमा परवीन ने शिक्षा विभाग से एक आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में विभाग ने स्पष्ट किया था कि स्पेशल एजूकेटर प्राइमरी के स्तर पर कोई पद सृजित नहीं किया गया है।
सभी उच्च स्कूलों में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विशेष प्रशिक्षक नियुक्त किए जाते हैं जिनके माध्यम से सभी विशेष बच्चों को पढ़ाया जाता है। लेकिन ऐसे शिक्षक प्राइमरी के बच्चों को कोई शिक्षण नहीं देते जिससे उनके विकास की संभावनाएं कम हो रही हैं।
दिल्ली में लगभग 4008 स्कूलों में अभी तक प्राइमरी स्तर पर कोई विशेष प्रशिक्षक नियुक्त नहीं है। निःशक्त जन आयुक्त कार्यालय को दी गई जानकारी में कई संस्थानों ने बताया है कि उनके यहां माध्यमिक स्तर और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विशेष शिक्षक नियुक्त किए गए हैं।
क्या कहा आरसीआई ने
दि्व्यांग लोगों की शिक्षा के नियमन से जुड़ी संस्था रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) ने कहा है कि सभी विशेष बच्चों के लिए नियम के मुताबिक विशेष शिक्षक उपलब्ध करवाना अनिवार्य है।
संस्था की कानूनी सलाहकार अनुजा सक्सेना ने अमर उजाला से कहा कि उनकी कोशिश होती है कि बच्चों के समग्र विकास के लिए सभी बच्चों को विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। बच्चों की आवश्यकता को देखते हुए अलग-अलग प्रकार के विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए भी उचित उपाय किये जाने चाहिए।