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दिल्ली: दिहाड़ी मजदूर ने आठ साल पहले किया था आवेदन, अब तक नहीं मिला राशन कार्ड, नाराज हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Sun, 31 Oct 2021 05:10 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दैनिक वेतनभोगी मजदूर की याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल मजदूर ने आठ साल पहले राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उसे राशन कार्ड नहीं मिला है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने एक दैनिक वेतनभोगी मजदूर को आठ वर्ष पूर्व आवेदन करने के बावजूद राशन कार्ड जारी न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। दरअसल दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्रीय अथारिटी द्वारा तय राशन कार्ड जारी करने की सीमा तय करने के कारण राशन कार्ड जारी नहीं किया जा रहा क्योंकि तय सीमा के तहत कार्ड जारी किए जा चुके है।

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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष पेश दिल्ली सरकार ने बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर केंद्र ने 72 लाख राशन कार्डों की सीमा तय की है जो पूरी हो चुकी है। अदालत एक दैनिक वेतनभोगी मजदूर की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसने अपने परिवार के सभी सदस्यों के नाम के साथ राशन कार्ड जारी करने का अनुरोध किया है।

अदालत ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली सरकार से पूछा था कि दैनिक वेतनभोगी मजदूर को राशन कार्ड जारी करने के लिए आवेदन आठ साल से क्यों लंबित है दिल्ली सरकार के अधिवक्ता गौतम नायर ने अदालत को बताया कि इस मामले में दिल्ली सरकार व अन्य एजेंसियों की कोई गलती नहीं है और केंद्र सरकार द्वारा तय सीमा का उल्लंघन कर ज्यादा राशन कार्ड जारी नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ही जवाब दे सकती है।
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अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच जनवरी 2022 की तारीख तय की है। याची ने कहा कि उसने सितंबर 2013 को अपने व परिवार के नाम पर राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन किया था।

वह दक्षिणी दिल्ली की झुग्गी में रहती है और उसके पति के नाम पर 2005 में राशन कार्ड जारी किया गया था लेकिन 2013 में उसे रद्द कर दिया गया। अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद अब नए सिरे से राशन कार्ड जारी नहीं किया जा रहा। कार्ड के अभाव में उन्हें सस्ती दरों का राशन नहीं मिल पा रहा और यह उनके अधिकारों का हनन है।

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