सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के दो मंत्रियों को राहत देते हुए उनके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें दोनों मंत्रियों को आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप मुक्त करने के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु के राजस्व मंत्री केकेएसएसआर रामचंद्रन और वित्त मंत्री थंगम थेनारासु को आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप मुक्त करने के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति पी के मिश्रा की पीठ ने मंत्रियों की तरफ से दायर अपील पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया। फिलहाल मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
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कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा तर्क
मामले में पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि स्वप्रेरणा से आपराधिक पुनरीक्षण में आरोप मुक्त करने के लिए उच्च न्यायालय की तरफ से अपनाई गई प्रक्रिया सही नहीं थी, जिसके बाद शीर्ष न्यायालय ने यह आदेश पारित किया। वकीलों ने कहा कि आपराधिक पुनरीक्षण करते समय उच्च न्यायालय यह नहीं मान सकता था कि सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) की तरफ से दायर क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं थी।
आदेश के खिलाफ SLP दायर करेगी राज्य सरकार
वहीं तमिलनाडु के महाधिवक्ता पट्टाभि सुंदर रमन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर करने की योजना बना रही है, क्योंकि यह डीवीएसी के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करता है। मद्रास उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त को निचली अदालत को निर्देश दिया था कि वह रामचंद्रन और थेनारासु को आय से अधिक संपत्ति के मामले से मुक्त करने के निचली अदालत के आदेश को दरकिनार करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करें।
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न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर आदेश पारित करते हुए विरुधुनगर के सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए विशेष अदालत के 20 जुलाई, 2023 और 12 दिसंबर, 2022 के आदेशों को दरकिनार कर दिया, जिसमें रामचंद्रन और थेनारासु को आय से अधिक संपत्ति के मामले से मुक्त किया गया था। दोनों वरिष्ठ डीएमके नेताओं को डीवीएसी की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज मामलों में मुकदमे का सामना करना होगा। वहीं अभियोजन पक्ष के अनुसार, रामचंद्रन ने अपने, अपनी पत्नी और मित्र के एस पी षणमुगामूर्ति के नाम पर, पिछली डीएमके सरकार के दौरान 2006 से 2011 के बीच स्वास्थ्य और पिछड़ा वर्ग मंत्री रहते हुए, अपने ज्ञात आय स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।