निखिल गुप्ता से जुड़े मामले में भारत के न्यायिक अधिकारियों का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। चेक न्याय मंत्रालय के प्रवक्ता व्लादिमीर रेपका ने यह जानकारी दी है। बता दें कुछ दिन पहले निखिल गुप्ता के परिवार ने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करने हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें प्रत्यर्पण कार्यवाही में हस्तक्षेप करने और मामले में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को निर्देश जारी करने की गुहार लगाई। इसके बाद चेक न्याय मंत्रालय का बयान सामने आया है।
चेक गणराज्य में निखिल गुप्ता हिरासत में
निखिल गुप्ता का अमेरिका में एक सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। आरोपी को चेक गणराज्य में हिरासत में लिए जाने के बाद से ही प्राग जेल में रखा गया है। हालांकि अमेरिका ने निखिल गुप्ता के प्रत्यर्पण के लिए चेक सरकार से संपर्क साधा है, इस संबंध में कार्यवाही चल रही है। व्लादिमीर रेपका ने कहा कि भारत के किसी भी न्यायिक अधिकारी के पास इस मामले में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, मामला चेक गणराज्य के सक्षम अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, निखिल गुप्ता का प्रतिनिधित्व उसकी अपनी पसंद के बचाव पक्ष के वकील पेट्र स्लेपी का द्वारा एक विदेशी राज्य में उसके प्रत्यर्पण की कार्यवाही में किया जाता है। साथ ही व्लादिमीर रेपका ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि जिसमें कहा गया कि निखिल गुप्ता को जेल में उचित आहार नहीं दिया जा रहा था।
अरिंदम बागची- राजनयिक सहायता प्रदान की जा रही है
गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि तीन बार निखिल गुप्ता तक राजनयिक पहुंच प्राप्त हुई और उन्हें आवश्यक राजनयिक सहायता प्रदान की जा रही है। बागची ने अपने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, एक भारतीय नागरिक वर्तमान में चेक अधिकारियों की हिरासत में है, जिसके अमेरिका में प्रत्यर्पण का अनुरोध लंबित है। उन्होंने कहा, हम आवश्यकता के अनुसार आवश्यक कांसुलर सहायता प्रदान कर रहे हैं।