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Report: सीवीसी भी नजरअंदाज? 34 मामलों में भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहे सरकारी विभाग

Mon, 23 Sep 2024 02:57 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 34 ऐसे मामले हैं, जिनमें भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में सीवीसी की सलाह का अनुपालन नहीं हुआ।
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34 बड़े मामले चिह्नित किए - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रेलवे सहित विभिन्न सरकारी विभागों ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) की सलाह को ‘नजरअंदाज’ किया है। दरअसल, सीवीसी ने सरकारी विभागों द्वारा नियमों का पालन नहीं करने के 34 बड़े मामले चिह्नित किए हैं। इससे साफ है कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की आयोग की सलाह को एक तरह से नजरअंदाज किया गया है। 

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सीवीसी ने 2023 की रिपोर्ट में किया जिक्र
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 34 ऐसे मामले हैं, जिनमें भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में सीवीसी की सलाह का अनुपालन नहीं हुआ। सीवीसी ने 2023 की रिपोर्ट में उन मामलो का भी जिक्र किया है जिनमें जांच में दोषी पाए गए अफसरों के खिलाफ आयोग की सिफारिशों को भी दरकिनार कर दिया गया। कुछ मामलों में इन भ्रष्ट अधिकारियों को या तो दोषमुक्त कर दिया गया या संबंधित विभागों द्वारा उन्हें बहुत कम सजा दी गई।

इसमें सबसे अधिक सात मामले कोयला मंत्रालय से जुड़े हैं। इसी तरह भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में पांच, आईडीबीआई बैंक में चार , इस्पात मंत्रालय के तहत तीन और बिजली मंत्रालय और एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के तहत दो-दो मामले हैं, जिनमें सीवीसी की सलाह की अनदेखी हुई है। 
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रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी), रेल मंत्रालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला।

इन कंपनियों का नाम भी लापरवाही में शामिल
सीवीसी की सलाह का नजरअंदाज करने का एक-एक मामला सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल), नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड, पंजाब नेशनल बैंक और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का भी था। 

ईमानदारी पर नजर रखने वाली संस्था की हालिया रिपोर्ट में कहा गया, 'आयोग की सलाह को अस्वीकार करने से सतर्कता प्रक्रिया प्रभावित होती है और सतर्कता प्रशासन की निष्पक्षता कमजोर होती है।'

कोयला मंत्रालय पर आयोग सख्त
कोयला मंत्रालय द्वारा अपनी सलाह का पालन न करने के एक मामले का ब्योरा देते हुए सीवीसी ने कहा कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के एक परियोजना अधिकारी, एक मुख्य प्रबंधक, तीन प्रबंधकों और एक निदेशक सहित अधिकारियों को भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी (एचईएमएम) को किराये पर लेने के लिए ठेका बंद करने, पुनः निविदा जारी करने और ठेका देने में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाया गया था। आयोग ने अगस्त 2018 में इन अधिकारियों के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए सलाह दी थी।

इन अधिकारियों पर की गई थी कार्रवाई
अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए जुर्माने के बावजूद परियोजना अधिकारी, मुख्य प्रबंधक, तीन प्रबंधकों और निदेशक ने संबंधित अपीलीय अधिकारियों के समक्ष अपील की, जिन्होंने जून 2022 और जून 2023 के बीच जारी अपने आदेशों के माध्यम से सभी अधिकारियों को दोषमुक्त कर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों को आरोपों से मुक्त करना आयोग की सलाह से बड़ा उल्लंघन है। इसके अलावा, एसबीआई के मामले में बैंक के क्षेत्रीय व्यापार कार्यालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना नई/मौजूदा शाखाओं के स्थानांतरण/नवीनीकरण/मरम्मत कार्य और अचल संपत्तियों की खरीद में भारी खर्च किया था। 

विभागीय जांच के बाद, अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने दोनों अधिकारियों (एक सहायक महाप्रबंधक और एक मुख्य प्रबंधक) पर बड़ा जुर्माना लगाया, जिनके खिलाफ आयोग ने अक्तूबर 2020 में बड़ी दंड कार्यवाही शुरू करने की सलाह दी थी। अपीलीय प्राधिकारी ने भी उनकी चूक को गंभीर प्रकृति का माना और दोनों अधिकारियों की अपील को खारिज कर दिया। हालांकि, समीक्षा समिति ने उनकी ओर से चूक देखने के बाद भी सितंबर 2022 में जारी अपने आदेश के माध्यम से दंड को प्रशासनिक चेतावनी में बदल दिया।

डीजेबी मामले में सीवीसी ने यह कहा
डीजेबी के मामले का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि यह देखा गया है कि कुछ कार्यों के निष्पादन के दौरान, अधूरे/घटिया काम को स्वीकार करने, अतिरिक्त सामग्री की बुकिंग, अधिक भुगतान और ठेकेदार को फर्जी भुगतान जैसी अनियमितताएं कथित तौर पर हुई थीं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। 
आयोग ने जूनियर इंजीनियर (जेई) के खिलाफ बड़ी पेनल्टी कार्यवाही शुरू करने के लिए पहले चरण की सलाह दी थी, जिसे अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने जून 2022 में जारी अपने आदेश के माध्यम से लगाया था। अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए जुर्माने से परेशान होकर जेई ने अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की, जिसने अनुशासनात्मक प्राधिकारी के आदेश को बरकरार रखा।

इसके बाद जेई ने संशोधन प्राधिकरण के समक्ष एक संशोधन याचिका दायर की, जिसने पिछले साल तीन जुलाई के अपने आदेश के माध्यम से बड़े जुर्माने को छोटे जुर्माने में बदल दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, संशोधन प्राधिकरण द्वारा मामूली जुर्माना लगाना आयोग की सलाह को नजरअंदाज करना है।

दिल्ली सरकार के मामले में भी आयोग की सलाह का उल्लंघन
दिल्ली सरकार के मामले में रिपोर्ट में कहा गया कि व्यय विभाग और सीवीसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए एक निजी कंपनी को श्रमबल रखने का ठेका देने में घोर कदाचार देखा गया। सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी प्राप्त किए बिना और इस तथ्य की अनदेखी करते हुए कि फर्म के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं थे, एक निजी फर्म को निविदा दी गई थी। 

आयोग ने अगस्त 2021 में मामलों में शामिल एक प्रशासनिक अधिकारी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने की सलाह दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुशासनात्मक प्राधिकार ने पिछले साल जुलाई में प्रशासनिक अधिकारी पर लगाए गए आरोपों को हटा दिया था और कहा था कि यह आयोग की सलाह से बड़ा उल्लंघन है। 

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