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CSS: केंद्रीय सचिवालय सेवा के अफसरों को 10 साल में नहीं मिली पदोन्नति, PM मोदी से लगानी पड़ी गुहार

सार

केंद्र सरकार में 'एसओ' के करीब 2100 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। डीओपीटी द्वारा इस मामले में केवल आधे ही पदों को भरने की तैयारी हो रही है। अगर ऐसा होता है तो 2013 बैच के लगभग आठ सौ सहायक अनुभाग अधिकारी 'एएसओ', जो पदोन्नति के लिए कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, वे छूट जाएंगे।
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Central Secretariat - फोटो : Social Media
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विस्तार
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केंद्र सरकार की 'रीढ़' कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' में बड़े पैमाने पर खाली पड़े सेक्शन अफसर यानी 'एसओ' की रिक्तियों को पदोन्नति के जरिए नहीं भरा गया। पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ रहे अधिकारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। सहायक अनुभाग अधिकारी 'एएसओ' को तय समय पर पदोन्नति न मिलने के कारण उन्हें करीब दस हजार रुपये मासिक, आर्थिक नुकसान हो रहा है। पिछले दिनों सैंकड़ों सीएसएस अधिकारी, नॉर्थ ब्लॉक के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। उसके बाद डीओपीटी की तरफ से कहा गया कि जल्द ही विभागीय पदोन्नति कमेटी यानी 'डीपीसी' की बैठक होगी।
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जुलाई में पदोन्नति दे दी जाएगी। सीएसएस अधिकारियों की एसोसिएशन के मुताबिक, डीओपीटी जो पॉलिसी बना रही है, उसमें केवल 800 से 1000 तक पदोन्नति देने की बात है। 2013 और 2014 बैच के लगभग दो हजार एएसओ, अनुभाग अधिकारी बनने की योग्यताएं पूरी करते हैं। सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) ने अब इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। 

संसदीय स्थायी समिति के सदस्य ने लिखा पत्र 
उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद मलूक नागर, जो संसदीय स्थायी समिति, कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य हैं, ने सचिव, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग राधा चौहान को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने 'एसओ' यानी अनुभाग अधिकारी ग्रेड में पदोन्नति का मुद्दा उठाया है। नागर ने लिखा है कि केंद्र सरकार में 'एसओ' के करीब 2100 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। डीओपीटी द्वारा इस मामले में केवल आधे ही पदों को भरने की तैयारी हो रही है। अगर ऐसा होता है तो 2013 बैच के लगभग आठ सौ सहायक अनुभाग अधिकारी 'एएसओ', जो पदोन्नति के लिए कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, वे छूट जाएंगे।कई 'एएसओ' तो ऐसे हैं, जो कुछ महीने बाद रिटायर हो रहे हैं। एएसओ की रिक्तियों को उपलब्धता के बाद भी नहीं भरा जाना, उनके साथ अन्याय होगा।
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लोकसभा सांसद ने अपने पत्र में यह भी लिखा है 'मैं संसद में कई बार देखता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी, संसद में पिछड़ों की बात करते हैं, लेकिन कुछ अधिकारी कांग्रेस की सरकारों के समय से जुड़े होने के कारण उसी मानसिकता से ग्रस्त हैं और आज भी उसी मानसिकता से काम कर रहे हैं'। प्रधानमंत्री के दस लाख नियुक्तियों के विजन को पूरा करने के मकसद से 2013 बैच के सभी एएसओ को पदोन्नत करने पर दोबारा से विचार किया जाए। इनके साथ न्याय किया जाए।

हक तो स्थायी पदोन्नति का है, वह संभव नहीं तो 'एडहॉक' दें
सीएसएस फोरम का कहना है, लंबे समय से काम कर रहे एएसओ को एसओ के स्थायी पद पर पदोन्नति मिलना उनका हक है। केंद्र सरकार में एसओ के स्वीकृत पदों की संख्या लगभग 3640 है। इनमें से 2100 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में मौजूदा अनुभाग अधिकारी कितने दबाव में काम कर रहे हैं, उनकी स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। फोरम द्वारा पदोन्नति के लिए लगातार उठाई जा रही आवाज का ही नतीजा है कि अब डीओपीटी ने एएसओ को प्रमोशन देने की बात कही है। हालांकि डीओपीटी द्वारा जो सूची तैयार की जा रही है, उसमें केवल 1000 लोगों को ही पदोन्नति मिलेगी। 

पहले 2013 बैच के सहायक अनुभाग अधिकारी, एसओ के पद की योग्यता पूरी करते थे, अब 2014 बैच वाले एएसओ भी एसओ की पदोन्नति लेने की सभी योग्यताएं पूरी कर रहे हैं। सीएसएस फोरम का कहना है कि केंद्र में जिस तरह रोजगार मेले आयोजित कर जॉब लैटर वितरित किए जा रहे हैं, वैसे ही सीएसएस की रिक्तियां भरने के लिए भी 'पदोन्नति मेला' आयोजित हो। अगर किसी कारणवश स्थायी पदोन्नति संभव नहीं है तो एडहॉक पदोन्नति दी जाए। 

विपक्षी दलों ने सीएसएस पदोन्नति का मुद्दा उठाया है
सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) द्वारा कई वर्षों से पदोन्नति का मुद्दा उठाया जा रहा है। इस विषय पर संसद में भी सवाल पूछे गए हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और सांसद भी इस संबंध में कार्मिक मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से आग्रह कर चुके हैं। राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला और सुशील कुमार गुप्ता ने भी 'एएसओ' को पदोन्नति न दिए जाने का मुद्दा उठाया था।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति की राह देखते-देखते अनेक अधिकारी तो रिटायर हो गए हैं। इससे पहले भी सीएसएस फोरम को पदोन्नति के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था। करीब 15 सौ सीएसएस अधिकारियों ने नॉर्थ ब्लॉक में हल्लाबोल किया था। वे पदोन्नति की मांग को लेकर नॉर्थ ब्लॉक की गैलरी में बैठ गए थे। बाद में उन्हें आश्वस्त किया गया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार होगा। 

900 से ज्यादा 'एएसओ', एडहॉक पदोन्नति केवल 288 को
सीएसएस फोरम का कहना है कि जब विभाग को स्थायी पदोन्नति न देकर, अस्थायी यानी एडहॉक पदोन्नति ही देनी थी तो उसमें सभी योग्य 'एएसओ' को शामिल किया जाना था। एडहॉक पदोन्नति की गाइड लाइन में लिखा है कि यह पदोन्नति किसी ग्रेड में कुल वैकेंसी के अगेंस्ट होती है। उसमें कोटा नहीं देखा जाता कि वह पदोन्नति एग्जाम कोटे से है या वरिष्ठता आधार पर मिल रही है। सभी योग्य लोगों को परमोशन देनी चाहिए थी। फोरम ने डीओपीटी से भी आग्रह किया था कि लगभग 1000 एएसओ, 'एसओ' बनने के पात्र हैं, उन्हें पदोन्नत किया जाए। उसके बाद सरकार ने केवल 288 को तदर्थ पदोन्नति देने की बात कही। उक्त अधिकारी नौ साल से एक ही पद पर काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद केवल 288 लोगों को ही पदोन्नति दी गई।

तदर्थ आधार पर बने एसओ के लिए शर्त भी रखी
डीओपीटी द्वारा जिन एएसओ को तदर्थ आधार पर एसओ बनाया गया, उनके लिए डेस्क पैटर्न पर काम करने की बात कही गई। यानी उन्हें किसी सहायक की मदद नहीं मिलेगी। 'एसओ' को ही सारा काम करना होगा। सामान्य तौर पर 'एसओ' के पास स्पोर्ट स्टाफ रहता है। इसमें दो-तीन 'एएसओ', एलडीसी, यूडीसी व एमटीएस शामिल होते हैं। सीएसएस फोरम के पदाधिकारी बताते हैं कि अगर नीचे सहायक स्टाफ नहीं है तो सरकार को तेज गति से पदोन्नति करनी चाहिए। वजह, जब निचला स्टाफ पदोन्नत होगा तो उसका पद खाली हो जाएगा। ऐसे में नई भर्ती की संभावना बनेगी। बेरोजगार युवाओं को नौकरी में आने का मौका मिलेगा। जब सभी योग्य एएसओ, एसओ बनेंगे तो एएसओ के पद रिक्त हो जाएंगे। वहां नए पद सृजित हो सकेंगे। एसएससी के जरिए उन पदों को भरा जा सकेगा।

गत वर्ष तक केंद्रीय मंत्रालयों में खाली पड़े थे इतने पद
रक्षा मंत्रालय में सेक्शन अफसर (अनुभाग अधिकारी) के कुल 232 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 141 पद खाली पड़े थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के 41 पद हैं, जिनमें से 27 पद रिक्त बताए गए। एमओएसटी में 51 पदों में से 40 पद खाली पड़े थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सेक्शन अफसर के कुल 296 पद थे, जिनमें से से 112 पद खाली पड़े थे। केमिकल मिनिस्ट्री में सेक्शन अफसर के कुल पद 12 हैं, इनमें से 10 पद खाली बताए गए।

फार्मा में सेक्शन अफसर के कुल 16 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 पद रिक्त थे। शिपिंग मंत्रालय में सेक्शन अफसर के लिए स्वीकृत 37 पदों में से 26 पद खाली पड़े थें जल संसाधन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 69 पद हैं। इनमें से 20 पद रिक्त थे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 39 पद थे, जिनमें से 24 पद खाली थे। इसी तरह श्रम मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के कुल 79 पद स्वीकृत हैं, गत वर्ष 35 पद खाली पड़े थे।

इन विभागों में भी हैं अनुभाग अधिकारी के खाली पद
पिछले साल तक की जानकारी के अनुसार, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के 184 पदों में से 46 पद रिक्त थे। कोल मिनिस्ट्री में अनुभाग अधिकारी के 24 पदों में से 15 पद रिक्त बताए गए। दूर संचार मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए स्वीकृत 39 पदों में से 27 पद खाली पड़े थे। लीगल अफेयर में सेक्शन अफसर के 31 पदों में से 13 पद रिक्त थे। डाक विभाग में 49 पदों में से 9 पद खाली पड़े थे।

नीति आयोग में अनुभाग अधिकारी के 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 10 पद खाली पड़े थे। डीएफएस में अनुभाग अधिकारी के कुल 29 पदों में से 13 पद रिक्त बताए गए। शिक्षा मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी के लिए 127 पद स्वीकृत थे, लेकिन 41 पद खाली पड़े थे। डीजीएचएस, एमओएचएफडब्लू में अनुभाग अधिकारी के 28 स्वीकृत पदों में से 20 पद रिक्त बताए गए थे। ट्राइबल अफेयर में भी अनुभाग अधिकारी के लिए 19 पद मंजूर किए गए थे, गत वर्ष तक आठ पद खाली थे।
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