सीआरपीएफ ने 'सेकंड-इन-कमांड' पद को 'एडिशनल कमांडेंट' पदनाम में बदलने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा है। गृह मंत्रालय 'एमएचए' ने बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल से इस बाबत राय मांगी है।
पुलिस में एसपी रैंक के बराबर होता है कमांडेंट
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में राजपत्रित अधिकारी 'कैडर' का पद 'सहायक कमांडेंट' से शुरू होता है। इसके बाद जब किसी की पदोन्नति होती है, तो वह डिप्टी कमांडेंट बन जाता है। डिप्टी कमांडेंट के बाद टू-आईसी यानी 'सेकंड इन कमांड' पद की बारी आती है। पदोन्नति के अगले क्रम में 'कमांडेंट' आता है। उसके बाद डीआईजी, आईजी, एडिशनल डीजी, एसडीजी और शीर्ष पर डीजी होता है। सीआरपीएफ की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्रालय को जो प्रस्ताव भेजा गया है, उसमें टूआईसी पद का नाम बदलकर 'एडिशनल कमांडेंट' करने का आग्रह किया गया है। कमांडेंट का पद राज्य पुलिस के एसपी के बराबर माना जाता है।
सिविल सोसायटी, इस पद के बारे में नहीं जानती
सीआरपीएफ ने इसके पीछे यह तर्क दिया है कि टूआईसी पद से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी सिविल सोसायटी में इस नाम को परिभाषित करने में खुद को असहज महसूस करते हैं। अगर वे किसी को बताते हैं कि वह टूआईसी पद से रिटायर हुआ है, तो सामने वाले पूछता है कि ये कौन सा पद होता है। किस रैंक के बाद ये पद मिलता है। इसका क्या काम होता है। केवल सिविल सोसायटी में ही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन में भी इस पद को लेकर समझ नहीं बनती। वहां भी उन्हें पद के बारे में विस्तृत तौर पर बताना पड़ता है।
हालांकि सीएपीएफ अधिकारी के लिए हर पद सम्मान एवं गौरव का प्रतीक होता है, लेकिन 'सेकंड इन कमांड' पद को लेकर थोड़ी झिझक बनी रहती है। स्थानीय पुलिस में एडिशनल एसपी 'अतिरिक्त एसपी' के पद से सभी वाकिफ होते हैं। सीआरपीएफ ने इसी तर्ज पर टूआईसी पद का नाम बदलकर उसे एडिशनल कमांडेंट पदनाम में तबदील करने का प्रस्ताव दिया है। गृह मंत्रालय ने 26 अप्रैल को इस संबंध में एक पत्र भेजकर दूसरे केंद्रीय बलों की राय मांगी है। सीआरपीएफ के अधिकारियों का कहना है कि बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल के कैडर अफसर भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।