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CRPF जवान अब इन नंबरों पर दर्जा करा सकेंगे अपनी शिकायत, सीधे मिल सकेंगे आईजी से

Fri, 17 Jan 2020 04:41 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिरोजाबाद में तैनात सीआरपीएफ के जवान - फोटो : अमर उजाला
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पिछले दिनों सीआरपीएफ के झारखंड सेक्टर में कई ऐसी घटनाएं हुई, जिनकी गूंज फोर्स के दिल्ली स्थित मुख्यालय तक पहुंची थी। जवानों और अधिकारियों में गुस्सा देखा गया। नतीजा, कहीं पर किसी जवान ने अपने अफसर को मार डाला, तो दूसरी ओर जूनियर अफसर ने अपने सीनियर अफसर को लीगल नोटिस भेजकर यह आरोप लगा दिया कि उसने सीआरपीएफ कर्मियों के साथ 'जानवरों जैसा सलूक' किया है।

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जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि सही समय पर बातचीत न होने के कारण ये घटनाएं हुई हैं। मौजूदा व्यवस्था में भी जवान अपने आला अधिकारी तक सीधे नहीं पहुंच सकता था। जवान तुरंत अपना दर्द आईजी को बता सके, झारखंड सेक्टर में अब ऐसी व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए एक मोबाइल नंबर जारी किया गया है। इस पर कोई भी जवान किसी भी वक्त कॉल, एसएमएस या व्हाट्सएप से अपनी बात कह सकता है।

बिना पूर्व अनुमति के आईजी से मिलने का प्रावधान किया गया है। आईजी के दोनों मोबाइल नंबर अब मैस, बारबर शॉप, मनोरंजन कक्ष और आउटपोस्ट पर भी लिखे जाएंगे।

सीआरपीएफ मुख्यालय ने उठाया कदम

झारखंड में सीआरपीएफ की 222वीं बटालियन के एक सहायक कमांडेंट (कंपनी कमांडर) ने पुलिस के आईजी नवीन कुमार सिंह को लीगल नोटिस भेज दिया था। इसमें कई तरह के आरोप लगाए गए थे। जैसे, आईजी ने सीआरपीएफ कर्मियों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया है। खाना पकाने के लिए जवानों को स्वच्छ पेयजल मुहैया नहीं कराया गया। जब शिकायत की गई, तो आग बुझाने वाले फायर टेंडर का पानी दिया गया। उस पानी में केवल खिचड़ी ही बन पाई।

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सहायक कमांडेंट ने अपने नोटिस में लिखा था कि उक्त पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर जवानों के सामने मेरी निजी जानकारियां लीक की हैं। इस मामले में मीडिया को भी गलत जानकारी दी गई। दिसंबर में झारखंड के दूसरे चरण के मतदान के बाद अपनी ड्यूटी खत्म कर रांची लौट रही गोल्फ कंपनी, जिसमें 80 जवान शामिल थे, उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

ऐसे आरोप भी लगे हैं कि प्रशासन के पास जब वाहन मौजूद थे, तो जवानों को 15-20 किमी की दूरी पैदल तय करने के लिए क्यों मजबूर किया गया। लीगल नोटिस में यह भी लिखा था कि रांची में प्रशासनिक व्यवस्था बेहद अपमानजनक और दयनीय थी। हालांकि शिकायत करने वाले कंपनी कमांडर को अगले ही दिन चुनावी ड्यूटी से हटाकर इंस्पेक्टर को कंपनी की कमान सौंप दी गई थी।

एक घटना में सीआरपीएफ के दो कर्मियों की मौत

दूसरी घटना के झारखंड के बोकारो में तैनात सीआरपीएफ की 226 वीं बटालियन की 'चार्ली' कंपनी में हुई हुई थी। उस भयावह घटना में सीआरपीएफ के एक अधिकारी सहित दो कर्मियों की मौत हो गई। किसी बात को लेकर कुछ जवानों के बीच आपसी कहासुनी चल रही थी। गाली-गलौच के दौरान जब उनका विवाद खत्म कराने के लिए सहायक कमांडेंट वहां पहुंचे तो गुस्से में आए जवान ने उन पर भी अपनी एके-47 से गोली चला दी।

वहां मौजूद दो अन्य जवानों को भी गोली लगी थी। कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में आइटीबीपी के एक जवान ने अपने पांच साथियों को गोली मार दी थी।

दो मोबाइल और नियंत्रण कक्षा का नंबर उपलब्ध

सीआरपीएफ के झारखंड सेक्टर मुख्यालय ने मोबाइल नंबर 9472782810 जारी किया है। इस नंबर पर कोई कर्मी किसी भी समय अपनी शिकायत, समस्या या सुझाव रख सकता है। अगर किसी को लगता है कि उसकी बात कॉल के जरिए ही पूरी होगी, तो वह प्रावधान भी किया गया है। जवान अपनी बात फोन पर भी कह सकता है। उसके पास एसएमएस और व्हाट्सएप का विकल्प भी रहेगा।

यह नंबर कंपनी, बटालियन मुख्यालय, ग्रुप केंद्र, संयुक्त अस्पताल, रेंज कार्यालय के विभिन्न स्थानों, जवानों की लाइन, बैरक, मनोरंजन कक्ष, मैस, बारबर शॉप और आउटपोस्ट पर प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही बल के अन्य नोटिस बोर्ड पर भी यह मोबाइल नंबर रहेगा। झारखंड सेक्टर के आईजी के दो मोबाइल नंबर 9760498236 /..8424025001 भी उक्त स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएंगे।

सीआरपीएफ कर्मियों से कहा गया है कि वे उक्त नंबरों पर बातचीत कर अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके अतिरिक्त जवान अपने सेक्टर आईजी से उनके कार्यालय में बिना पूर्व अनुमति के मिल भी सकते हैं। सामान्य प्रक्रिया में किसी भी जवान के लिए आईजी से मिलना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए जवान को सबसे पहले अपने हवलदार से पूछता होता है। उसके बाद सूबेदार मेजर या इंस्पेक्टर, फिर सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, कमांडेंट और डीआईजी से मंजूरी मिलने के बाद जवान अपने आईजी से मुलाकात कर सकता है।

अधिकांश केसों में जवान उस अधिकारी तक नहीं पहुंच पाता, जिसके सामने प्रस्तुत होकर वह अपनी बात कहना चाहता है। यही बात कहीं न कहीं जवानों को गुस्से की ओर ले जाती है। इसी के चलते अब आईजी के मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया है।

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