पिछले दिनों सीआरपीएफ के झारखंड सेक्टर में कई ऐसी घटनाएं हुई, जिनकी गूंज फोर्स के दिल्ली स्थित मुख्यालय तक पहुंची थी। जवानों और अधिकारियों में गुस्सा देखा गया। नतीजा, कहीं पर किसी जवान ने अपने अफसर को मार डाला, तो दूसरी ओर जूनियर अफसर ने अपने सीनियर अफसर को लीगल नोटिस भेजकर यह आरोप लगा दिया कि उसने सीआरपीएफ कर्मियों के साथ 'जानवरों जैसा सलूक' किया है।
झारखंड में सीआरपीएफ की 222वीं बटालियन के एक सहायक कमांडेंट (कंपनी कमांडर) ने पुलिस के आईजी नवीन कुमार सिंह को लीगल नोटिस भेज दिया था। इसमें कई तरह के आरोप लगाए गए थे। जैसे, आईजी ने सीआरपीएफ कर्मियों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया है। खाना पकाने के लिए जवानों को स्वच्छ पेयजल मुहैया नहीं कराया गया। जब शिकायत की गई, तो आग बुझाने वाले फायर टेंडर का पानी दिया गया। उस पानी में केवल खिचड़ी ही बन पाई।
दूसरी घटना के झारखंड के बोकारो में तैनात सीआरपीएफ की 226 वीं बटालियन की 'चार्ली' कंपनी में हुई हुई थी। उस भयावह घटना में सीआरपीएफ के एक अधिकारी सहित दो कर्मियों की मौत हो गई। किसी बात को लेकर कुछ जवानों के बीच आपसी कहासुनी चल रही थी। गाली-गलौच के दौरान जब उनका विवाद खत्म कराने के लिए सहायक कमांडेंट वहां पहुंचे तो गुस्से में आए जवान ने उन पर भी अपनी एके-47 से गोली चला दी।
वहां मौजूद दो अन्य जवानों को भी गोली लगी थी। कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में आइटीबीपी के एक जवान ने अपने पांच साथियों को गोली मार दी थी।
सीआरपीएफ के झारखंड सेक्टर मुख्यालय ने मोबाइल नंबर 9472782810 जारी किया है। इस नंबर पर कोई कर्मी किसी भी समय अपनी शिकायत, समस्या या सुझाव रख सकता है। अगर किसी को लगता है कि उसकी बात कॉल के जरिए ही पूरी होगी, तो वह प्रावधान भी किया गया है। जवान अपनी बात फोन पर भी कह सकता है। उसके पास एसएमएस और व्हाट्सएप का विकल्प भी रहेगा।
यह नंबर कंपनी, बटालियन मुख्यालय, ग्रुप केंद्र, संयुक्त अस्पताल, रेंज कार्यालय के विभिन्न स्थानों, जवानों की लाइन, बैरक, मनोरंजन कक्ष, मैस, बारबर शॉप और आउटपोस्ट पर प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही बल के अन्य नोटिस बोर्ड पर भी यह मोबाइल नंबर रहेगा। झारखंड सेक्टर के आईजी के दो मोबाइल नंबर 9760498236 /..8424025001 भी उक्त स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएंगे।
सीआरपीएफ कर्मियों से कहा गया है कि वे उक्त नंबरों पर बातचीत कर अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके अतिरिक्त जवान अपने सेक्टर आईजी से उनके कार्यालय में बिना पूर्व अनुमति के मिल भी सकते हैं। सामान्य प्रक्रिया में किसी भी जवान के लिए आईजी से मिलना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए जवान को सबसे पहले अपने हवलदार से पूछता होता है। उसके बाद सूबेदार मेजर या इंस्पेक्टर, फिर सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, कमांडेंट और डीआईजी से मंजूरी मिलने के बाद जवान अपने आईजी से मुलाकात कर सकता है।
अधिकांश केसों में जवान उस अधिकारी तक नहीं पहुंच पाता, जिसके सामने प्रस्तुत होकर वह अपनी बात कहना चाहता है। यही बात कहीं न कहीं जवानों को गुस्से की ओर ले जाती है। इसी के चलते अब आईजी के मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया है।