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CRPF: शौर्य चक्र की राशि में भेदभाव, हरियाणा सरकार CAPF को नहीं मानती 'भारत संघ के सशस्त्र बल'

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 17 Feb 2023 04:32 PM IST

सार

CRPF: सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह को हरियाणा सरकार से तय सम्मान राशि नहीं मिल रही है। अगर यही शौर्य चक्र, सेना में किसी को मिलता है, तो उसे बिना कोई देरी किए, 31 लाख रुपये दे दिए जाते हैं। जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए हैं...
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CRPF के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह - फोटो : Amar Ujala

दिल्ली हाई कोर्ट ने भले ही 11 जनवरी को दिए अपने फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है, लेकिन हरियाणा सरकार ऐसा नहीं मानती। इसी वजह से सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह को हरियाणा सरकार से तय सम्मान राशि नहीं मिल रही है। अगर यही शौर्य चक्र, सेना में किसी को मिलता है, तो उसे बिना कोई देरी किए, 31 लाख रुपये दे दिए जाते हैं। जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए हैं। वे लंबे समय से अपनी बकाया राशि के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सीआरपीएफ मुख्यालय ने भी इस बाबत हरियाणा सरकार को लिखा है। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में हरियाणा सरकार ने दूसरे प्रदेशों से यह जानकारी मांगी है कि उनके यहां शौर्य चक्र विजेता को कितनी राशि मिलती है। उसके बाद ही दोबारा से इस केस की फाइल पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय लेगा अंतिम निर्णय

यह मामला गत वर्ष से ही फाइलों में है। सितंबर 2022 में इस बाबत मुख्य सचिव, सैनिक/अर्धसैनिक कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार के साथ पत्राचार हुआ था। वहां से जानकारी मिली कि यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया है। हरियाणा सरकार के सूत्र बताते हैं, इस पर विचार हो रहा है। दूसरे राज्यों में शौर्य चक्र विजेता को क्या कुछ मिलता है, वह जानकारी एकत्रित की जा रही है। हरियाणा सरकार इस केस को लेकर गंभीर है। इससे पहले भी सरकार ने सीएपीएफ डेथ के मामले में पचास लाख रुपये देने का प्रावधान किया है। इस केस के निपटारे में समय लग सकता है। हालांकि इस बाबत कोई अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा लिया जाएगा।

जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए

हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम जिला निवासी, सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए हैं। जिले सिंह ने 2017 में अपनी टीम के साथ लेथपोरा के सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। दहशतगर्दों का खात्मा और अपने 12 साथियों की रक्षा करने के लिए उन्हें 'शौर्य' चक्र प्रदान किया गया था। सहायक कमांडेंट जिले सिंह ने दक्षिण कश्मीर रेंज में बतौर क्यूएटी ऑप्स कमांडर, पांच साल तक ड्यूटी की है। दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया गया। उन्होंने आतंकियों का खात्मा करने वाले कई बड़े अभियानों में हिस्सा लिया है। 2017 में सीआरपीएफ के लेथपोरा कैंप पर जब आतंकियों ने हमला किया, तो जिले सिंह और उनकी टीम ने बहादुरी से उनका मुकाबला किया। वहां पर सीआरपीएफ के दर्जनभर जवान, आतंकियों के निशाने पर थे। लगभग 36 घंटे तक चले ऑपरेशन में जैश के तीन आतंकी मारे गए।

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CRPF के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह - फोटो : Amar Ujala

दिल्ली हाई कोर्ट ने भले ही 11 जनवरी को दिए अपने फैसले में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' माना है, लेकिन हरियाणा सरकार ऐसा नहीं मानती। इसी वजह से सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह को हरियाणा सरकार से तय सम्मान राशि नहीं मिल रही है। अगर यही शौर्य चक्र, सेना में किसी को मिलता है, तो उसे बिना कोई देरी किए, 31 लाख रुपये दे दिए जाते हैं। जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए हैं। वे लंबे समय से अपनी बकाया राशि के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सीआरपीएफ मुख्यालय ने भी इस बाबत हरियाणा सरकार को लिखा है। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में हरियाणा सरकार ने दूसरे प्रदेशों से यह जानकारी मांगी है कि उनके यहां शौर्य चक्र विजेता को कितनी राशि मिलती है। उसके बाद ही दोबारा से इस केस की फाइल पर विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय लेगा अंतिम निर्णय

यह मामला गत वर्ष से ही फाइलों में है। सितंबर 2022 में इस बाबत मुख्य सचिव, सैनिक/अर्धसैनिक कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार के साथ पत्राचार हुआ था। वहां से जानकारी मिली कि यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया है। हरियाणा सरकार के सूत्र बताते हैं, इस पर विचार हो रहा है। दूसरे राज्यों में शौर्य चक्र विजेता को क्या कुछ मिलता है, वह जानकारी एकत्रित की जा रही है। हरियाणा सरकार इस केस को लेकर गंभीर है। इससे पहले भी सरकार ने सीएपीएफ डेथ के मामले में पचास लाख रुपये देने का प्रावधान किया है। इस केस के निपटारे में समय लग सकता है। हालांकि इस बाबत कोई अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा लिया जाएगा।

जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए

हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम जिला निवासी, सीआरपीएफ के शौर्य चक्र विजेता जिले सिंह को महज सात लाख रुपये दिए गए हैं। जिले सिंह ने 2017 में अपनी टीम के साथ लेथपोरा के सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। दहशतगर्दों का खात्मा और अपने 12 साथियों की रक्षा करने के लिए उन्हें 'शौर्य' चक्र प्रदान किया गया था। सहायक कमांडेंट जिले सिंह ने दक्षिण कश्मीर रेंज में बतौर क्यूएटी ऑप्स कमांडर, पांच साल तक ड्यूटी की है। दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया गया। उन्होंने आतंकियों का खात्मा करने वाले कई बड़े अभियानों में हिस्सा लिया है। 2017 में सीआरपीएफ के लेथपोरा कैंप पर जब आतंकियों ने हमला किया, तो जिले सिंह और उनकी टीम ने बहादुरी से उनका मुकाबला किया। वहां पर सीआरपीएफ के दर्जनभर जवान, आतंकियों के निशाने पर थे। लगभग 36 घंटे तक चले ऑपरेशन में जैश के तीन आतंकी मारे गए।

CRPF के शौर्य चक्र विजेता, सहायक कमांडेंट जिले सिंह - फोटो : Amar Ujala
मोस्ट वांटेड आतंकी रियाज नायकू मारा गया था

उक्त ऑपरेशन में सीआरपीएफ जवानों की हिफाजत के लिए सहायक कमांडेंट जिले सिंह ने रूम इंटरवेंशन किया। उन्होंने चौथी मंजिल पर पहुंचकर एक आतंकी को मार गिराया। बाकी बचे दो दहशतगर्दों को भी इसी तरह ठिकाने लगाया गया। दक्षिण कश्मीर के अवंतीपुरा के गांव बेईघबोरा में, सुरक्षा बलों की जिस टीम ने मोस्ट वांटेड आतंकी रियाज नायकू को मार गिराया था, उस ऑपरेशन में भी सहायक कमांडेंट जिले सिंह की खास भूमिका रही। इस ऑपरेशन में आर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस व सीआरपीएफ शामिल थी। ऑपरेशन के दौरान जिले सिंह के हाथ में चोट लगी थी। अतिरिक्त सहायक कमांडेंट जिले सिंह ने ऐसे ही दर्जनों दूसरे ऑपरेशन में भी अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया था।

शौर्य चक्र एक है तो सम्मान राशि में भेदभाव क्यों

आर्मी या सीएपीएफ में शौर्य चक्र विजेता को संबंधित राज्य की सरकार भी निर्धारित सम्मान राशि प्रदान करती है। यह राशि सभी प्रांतों में एक जैसी नहीं होती। राजस्थान में ऐसे बहादुरों को 25 बीघा जमीन तक दी जाती रही है। बाद में उस जमीन की कीमत के हिसाब से पैसे मिलने लगे। हरियाणा सरकार, सेना के शौर्य चक्र विजेता को 31 लाख रुपये देती है। अगर सीएपीएफ में शौर्य चक्र मिलता है, तो उसे सात लाख रुपये दे देते हैं। सम्मान राशि में भेदभाव का यह मामला स्थानीय नेताओं से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक भी पहुंचा है, लेकिन अभी तक मामला नहीं निपट सका। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ ने भरोसा दिया था कि जिले सिंह को उनका पूरा हक मिलेगा। हालाँकि अभी तक सहायक कमांडेंट को उसका हक नहीं मिल सका।

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