सीआरपीएफ के ग्राउंड कमांडर यानी 'सहायक कमांडेंट' भले ही आतंकियों व नक्सलियों से निपटने, राष्ट्रीय आपदा, चुनाव और कानून व्यवस्था के मामले में अव्वल रहते हों, मगर वे तरक्की के मोर्चे पर पिछड़ते जा रहे हैं। हैरानी की बात तो ये है कि इन जांबाज कमांडरों की कैडर समीक्षा प्रक्रिया को लेकर 'केंद्रीय गृह मंत्रालय और बल मुख्यालय' गंभीर नहीं हैं। डीओपीटी द्वारा फरवरी में कैडर समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया था। जून 2021 में वह रिपोर्ट कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी 'एमएचए' द्वारा डीओपीटी के पास जमा करानी थी। अभी तक वह रिपोर्ट बल मुख्यालय से ही बाहर नहीं निकल सकी है। सीआरपीएफ कैडर अधिकारियों का कहना है कि 'सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट और सेकेंड इन कमांड' इन तीन पदों पर प्रमोशन लेना बहुत मुश्किल हो गया है। सहायक कमांडेंट को पहली पदोन्नति मिलने में 10-12 साल से ज्यादा समय लग रहा है। अगर यूं ही चलता रहा तो उन्हें कमांडेंट तक पहुंचने में 25 साल लग जाएंगे। मतलब रिटायरमेंट की दहलीज पर जाकर, उन्हें बटालियन को कमांड करने का मौका मिल सकेगा। कैडर अफसरों की नजरें अब 30 सितंबर को बल मुख्यालय में होने जा रही समीक्षा बैठक पर लग गई हैं। सीआरपीएफ एडीजी सेंट्रल जोन, नितिन अग्रवाल ‘कैडर रिव्यू कमेटी ऑफ ग्रुप ए एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स’, की अध्यक्षता करेंगे।
बता दें कि पहले तत्कालीन स्पेशल डीजी जेएंडके जोन, संजय अरोड़ा को इस कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। पिछले दिनों उनकी पोस्टिंग डीजी आईटीबीपी के पद पर हो गई। इसके बाद नितिन अग्रवाल को कैडर रिव्यू कमेटी ऑफ ग्रुप ए एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स, के चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कैडर रिव्यू को लेकर बल की कई यूनिटों से सुझाव लिए गए हैं। बल के कैडर अधिकारियों के अलावा मिनिस्ट्रियल स्टाफ की तरफ से भी रिपोर्ट मिली है। यह कैडर प्रक्रिया हर पांच साल बाद होती है। इससे पहले 15 दिसंबर 2015 को कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी ने सीआरपीएफ के कैडर रिव्यू को लेकर बैठक की थी। उसके बाद केंद्रीय कैबिनेट ने 29 जून 2016 को कैडर रिव्यू के फाइनल प्रपोजल को मंजूरी दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पदोन्नति से जुड़े मामले में यह आदेश दिया था कि सीआरपीएफ में कैडर समीक्षा की कार्यवाही 30 जून तक पूरी कर ली जाए। इसके बावजूद केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ मुख्यालय ने गंभीरता नहीं दिखाई। जून तक कैडर समीक्षा रिपोर्ट जमा नहीं हो सकी। 10 सितंबर को डीओपीटी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिमाइंडर भेजा गया है।