सीट बंटवारे के सवाल पर विपक्षी गठबंधन इंडिया के सहयोगी दलों में कांग्रेस के प्रति दूरी लगातार बढ़ती जा रही है। जदयू ने कांग्रेस पर भाजपा के हाथों खेलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह गठबंधन की जगह अपना हित साधने में लगी हुई है। जदयू ने यह भी कहा कि बतौर गठबंधन का संस्थापक बिहार के सीएम नीतीश कुमार का ओहदा संयोजक पद से बड़ा है। इस बीच मंगलवार को महाराष्ट्र में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करने के लिए कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक से उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने दूरी बना ली है।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि समस्या कांग्रेस की मानसिकता है। जहां कांग्रेस सत्ता में है या भाजपा के विरोध में सबसे बड़ी पार्टी है, वहां सीट बंटवारे को लेकर कोई समस्या नहीं है। वह इसलिए कि कांग्रेस को किसी दल को सीटें ही नहीं देनी। इसके उलट, जिन राज्यों में कांग्रेस कमजोर है, वहां अव्यवहारिक और असामान्य रूप से ज्यादा सीटें मांग रही है। क्षेत्रीय दलों को गठबंधन की तो कांग्रेस को बस अपनी चिंता है।
नहीं चाहिए संयोजक पद
त्यागी ने यह भी कहा कि जदयू को संयोजक पद नहीं चाहिए। यह सवाल अब हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। नीतीश गठबंधन के संस्थापक हैं, ऐसे में उनका ओहदा संयोजक पद से बड़ा है। यह कांग्रेस को तय करना है कि वह गठबंधन का ढांचा कैसे तैयार करती है। हमारी चिंता बस इतनी है कि लोकसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा बहुत आगे निकल गई है।
भाजपा के हाथ में खेल रही कांग्रेस
त्यागी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति शासन की मांग की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सहयोगी दल शासित राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग भाजपा के हाथों में खेलने जैसा है।
बैठक में शामिल नहीं होंगे पवार-उद्धव
महाराष्ट्र में सीट बंटवारे पर पेच फंसने के कारण शिवसेना यूबीटी के मुखिया उद्धव ठाकरे और एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने मंगलवार को कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक से दूरी बना ली है। उद्धव की ओर से संजय राउत तो पवार की ओर से सुप्रिया सुले बैठक में हिस्सा लेंगी। एनसीपी सूत्रों का कहना है कि चूंकि सीट बंटवारे का फॉर्मूला निकलने की संभावना नहीं है, ऐसे में दोनों वरिष्ठ नेताओं ने दूर रहने का फैसला किया है।