फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Criminal Laws: आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले विधेयक संसदीय समिति में होंगे पेश, तीन महीने में आएगी रिपोर्ट

Thu, 24 Aug 2023 01:06 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संसद की स्थायी समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। ऐसे में सरकार संसद के अगले सत्र में इन विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है। 
विज्ञापन
लोकसभा - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंडियन पीनल कोड (आईपीसी), क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC) और एविडेंस एक्ट की जगह लेने वाले विधेयकों की आज संसदीय समिति द्वारा जांच की जाएगी। गृह मामलों की संसदीय समिति इन विधेयकों की जांच करेगी और गृह सचिव अजय भल्ला भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक पर समिति के सदस्यों के सामने प्रजेंटेशन (प्रस्तुतिकरण) देंगे। 
विज्ञापन


तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी संसदीय समिति
बता दें कि उक्त तीनों विधेयक मौजूदा आपराधिक कानूनों आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे। सरकार ने मानसून सत्र के दौरान इन विधेयकों को लोकसभा में पेश किया था। सरकार ने विधेयक पेश करते हुए कहा था कि इन विधेयकों को लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। संसद की स्थायी समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। ऐसे में सरकार संसद के अगले सत्र में इन विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है। भाजपा नेता बृजलाल संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। 

स्थायी समिति की कई बैठकें होंगी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन विधेयकों को लोकसभा में पेश किया और कहा कि ये विधेयक भारत की न्याय व्यवस्था को बदल देंगे। अमित शाह ने ये भी कहा कि इन विधेयकों के लागू होने के बाद लोगों को समय से न्याय मिल सकेगा। सरकार की कोशिश है कि शीतकालीन सत्र में चर्चा के बाद ये विधेयक संसद से पारित करा लिए जाएं। इन विधेयकों पर चर्चा के लिए संसद की स्थायी समिति की आने वाले दिनों में कई बैठकें होंगी। संसद से पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद तीनों विधेयक मौजूदा आपराधिक कानूनों की जगह ले लेंगे।  
विज्ञापन


बता दें कि इन विधेयकों में मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त नियम बनाए गए हैं। साथ ही देशद्रोह कानून को भी खत्म करके नया कानून लाया जाएगा। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में भी सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें