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बिहार चुनाव के नतीजे बता रहे कि वामपंथ के प्रति धारणा गलत : सीताराम येचुरी

Wed, 11 Nov 2020 04:06 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
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माकपा महासचिव सीताराम येचुरी - फोटो : ANI
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बिहार में तीन वामपंथी दलों के 16 सीटें जीतने पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने आलोचकों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्हें अधिक सीटें दी जातीं, तो वे चुनावों में बहुमत में होते। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के नतीजे यह बताने के लिए काफी हैं कि वामपंथ के प्रति लोगों की धारणा गलत है।

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वाम दलों ने बिहार विधानसभा चुनाव में 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था। येचुरी ने कहा कि हम शुरू से ही भाजपा को हराने के लिए प्रतिबद्ध थे। बिहार में हमारा स्ट्राइक रेट 80 फीसदी है और अगर हमें ज्यादा सीटें दी जातीं, तो हमने गठबंधन में ज्यादा योगदान किया होता। राजद और कांग्रेस के साथ हमारे गठबंधन ने सामाजिक न्याय के मुद्दों को आर्थिक न्याय के साथ जोड़ा है। एक को दूसरे के बिना हासिल नहीं किया जा सकता है।
 
 
20 साल में पहली बार बडे़ भाई की भूमिका में भाजपा
भाजपा को राज्य में 2015 से भी 21 सीटें ज्यादा मिली। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 74 सीटों पर जीत दर्ज की हैं। 2015 में उसे 53 सीटें मिली थीं। जदयू को करीब 28 सीटों का नुकसान हुआ है। उसे 43 सीटें मिली हैं। 2015 में जदयू को 71 सीटें मिली थीं। मौजूदा परिणामों के बाद बिहार और एनडीए में काफी कुछ बदलने वाला है। बिहार में भाजपा और जदयू की भूमिका और रुतबा दोनों बदलेगा। जदयू अब तक बिहार में भाजपा के बडे़ भाई की भूमिका में होती थी। सीट बंटवारे में भी यह दिखता रहा है। बडे़ और छोटे भाई की भूमिका में बदलाव एक-दो साल में नहीं, बल्कि 20 साल में हुआ है।
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नीतीश ने जहां कहा था, यह मेरा आखिरी चुनाव...वहां जदयू प्रत्याशी जीता
...जान लीजिए, आज चुनाव का आखिरी दिन है, अब परसों चुनाव है, और यह मेरा अंतिम चुनाव है, अंत भला तो सब भला। आखिरी चरण के मतदान के लिए बीते बृहस्पतिवार को चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्णिया के धमदाहा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए इस चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बताकर सियासी गलियारे में एक नई चर्चा छेड़ दी थी। धमदाहा विधानसभा सीट से जदयू प्रत्याशी लेशी सिंह की जीत हुई है।

सीमांचल में ओवैसी ने बिगाड़ा महागठबंधन का खेल
असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सीमांचल में महागठबंधन का नुकसान किया है। ओवैसी ने बिहार में बसपा और रालोसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और 20 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इनमें पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी को करीब सवा फीसदी वोट मिले हैं। इनमें ज्यादातर मुस्लिम बहुल क्षेत्र के हैं। माना जा रहा है कि इसका सीधा नुकसान राजद और कांग्रेस को हुआ है।

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एमपी: शिवराज का बचा ताज, कमल नहीं बन सके नाथ

बिहार के साथ-साथ भाजपा ने मध्यप्रदेश उपचुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। मध्यप्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। हाल ही में दमोह से विधायक राहुल सिंह के इस्तीफे के बाद फिलहाल अब जब बहुमत साबित करने की बारी आएगी तो 229 सीटों के हिसाब से बहुमत का आंकड़ा 115 रहेगा। भाजपा के पास अभी 107 विधायक हैं। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 87 विधायक हैं।

मध्यप्रदेश के 19 जिलों की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में 19 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस को नौ सीटें मिली है। भाजपा को सत्ता बचाने के लिए महज आठ सीटें जीतने की जरूरत थी, जबकि कांग्रेस को सभी 28 सीटें जीतनी थी। ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेहद मजबूती से उभरे हैं, जबकि सीएम की कुर्सी पर फिर वापसी की फिराक में बैठे कांग्रेस के कमलनाथ को निराशा ही हाथ लगी है।
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