नए वक्फ कानून को लेकर देशभर में सियासी गर्माहट दिन-प्रतिदिन और तेज होता हुआ जा रहा है। विपक्षी दल और कई मुस्लिम लीग इस कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे है। इतना ही नहीं देश के कई हिस्सों में विरोध इतना तेज हो गया है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा की भी खबरें सामने आ रही है। इसी बीच अब इस कानून के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वक्फ कानून के विरोध में आए सीपीआई ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। बता दें कि अब तक इस मामले में दर्जनों याचिका दायर की जा चुकी है, जिसपर 16 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
सीपीआई का आरोप
सीपीआई के महासचिव डी. राजा की ओर से दायर इस रिट याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन करता है। पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि इस कानून को संसद में जनता और अन्य हितधारकों की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए पारित कर दिया गया। साथ ही याचिका में कहा गया है कि यह कानून वक्फ बोर्ड की स्वतंत्रता को खत्म करता है और केंद्र सरकार को अनियंत्रित अधिकार देता है।
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याचिका सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता राम शंकर के माध्यम से दायर की गई है। सीपीआई ने तर्क दिया है कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों की गारंटी देते हैं।
वक्फ के विरोध में इन नेताओं की याचिका
गौरतलब है कि वक्फ कानून के विरोध में इससे पहले भी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी हैं। हाल ही में अभिनेता और टीवीके अध्यक्ष विजय, AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान सहित कई अन्य लोगों ने भी इस कानून को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ 16 अप्रैल को इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इस पीठ में न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन भी शामिल होंगे।
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दर्जनों याचिका पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार अब तक इस मामले में कुल मिलाकर दर्जन से ज्यादा याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। इनमें एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, अरशद मदनी, समस्त केरल जमीयतुल उलेमा, अंजुम कादरी, तैय्यब खान सलमानी, मोहम्मद शफी, मोहम्मद फजलुर्रहीम और राजद नेता मनोज झा जैसे नाम शामिल हैं। कुछ याचिकाएं अभी रजिस्ट्री में लंबित हैं और उन्हें भी जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।