कोरोना संकट के बीच भारत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का मंत्र साकार किया है। कई पड़ोसी मुल्कों के साथ ही भारत 55 देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की खेप भेज रहा है। इनमें प्रमुख रूप से अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, ओमान, यूएई, और नीरदलैंड जैसे देश शामिल हैं।
ऐसे वक्त में जब अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद रोक दी औैर चीन व्यापारिक हित को प्राथमिकता दे रहा है, भारत ने दुनिया के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। इसके लिए भारत ने कई देशों के साथ पुरानी दुश्मनी भी भुला दी है। लॉकडाउन के चलते फंसे 41 पाक नागरिकों के लिए मदद का अनुरोध आने के महज 24 घंटे बाद भारत ने उसके 41 नागरिकों को आठ अलग-अलग जगहों से वापस भेजा।
अनुच्छेद 370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ मलयेशिया, तुर्की, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान सहित कई मुस्लिम देशों ने भारत का विरोध किया था। पर पड़ोसी मुल्क मलयेशिया की मदद की, भले ही उसने विवादास्पद धार्मिक प्रचारक जाकिर नाइक का प्रत्यर्पण करने से इनकार कर दिया।
दुनिया के देशों को मदद की मुहिम की देखरेख खुद पीएम नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। मोदी रोज आधा दर्जन देशों के प्रमुखों से फोन पर बात कर उनकी जरूरतों की जानकारी लेते हैं।