कोरोना वायरस को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण लोगों का किराने का बिल बढ़ गया है। लोग बड़ी मात्रा में एफएमसीजी उत्पादों (जल्दी बिकने वाले उत्पाद) को खरीद रहे हैं। मार्च में लोगों के किराने के बिलों में दोगुना की बढ़ोतरी देखने को मिली।
कोरोना वायरस के दिनों में इसमें अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। उपभोक्ता उत्पादों के अधिकारियों का कहना है कि मांग के बढ़ने के पीछे का कारण साफ-सफाई और लोगों द्वारा घरों पर खाना बनाने को महत्वता देना है।
स्पेंसर रिटेल और नेचर्स बास्केट के सीईओ देवेंद्र चावला ने कहा कि कोविड-19 से पहले की तुलना में अब किराने के बिल में 1.5 गुना की बढ़ोतरी हुई है। जब लॉकडाउन शुरू हुआ, उस दौरान इसमें अधिक बढ़ोतरी हुई, क्योंकि लोगों को दुकानों पर सामान के खत्म होने का डर था।
रिटेल-टेक स्टार्टअप स्नेपबिज के सीईओ प्रेम कुमार ने दस लाख से ज्यादा किराना दुकानों के उपभोक्ता डाटा का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि मार्च के पहले सप्ताह में एक बिल की माध्यिका 650 रुपये रही, जो अप्रैल के पहले सप्ताह तक बढ़कर 1,000 रुपये हो गई और अब यह 900 रुपये हो गई है। उपभोक्ता बिस्किट, नूडल्स, स्नैक के उत्पादों, हैंड वॉश, दाल, गेहूं और चीनी जैसे उत्पादों को बड़ी मात्रा में खरीद रहे हैं।
आईटीसी फूड्स के प्रभागीय सीईओ हेमंत मलिक ने कहा कि बिस्किट और नूडल्स के लिए लोगों के बीच मांग बढ़ी है और लोग इन उत्पादों के बड़े पैक्स को खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि ऐसा उपभोक्ता इसलिए कर रहे हैं, ताकि उन्हें बार-बार दुकानों का चक्कर न लगाना पड़े। ऐसा इसलिए भी हो रहा है क्योंकि दुकानों को खोलने के लिए एक निश्चित अवधि तय की गई है।
मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया के एमडी और सीईओ अरविंद मैदिरत्ता ने कहा कि लोग आम तौर पर मैगी नूडल्स के 4-6 वाले पैक्स को खरीदते है, लेकिन अब 24 पैक्स वाले नूडल्स को खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही बिस्किट, पास्ता, आटा और दाल के साथ भी देखने को मिला रहा है, क्योंकि लोग घरों पर हैं और ज्यादा चीजों का उपभोग कर रहे हैं।