आंकड़ों का हो रहा अध्ययन
इसके साथ ही स्थानीय आंकड़ों का भी अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञ संक्रमण के पैटर्न, वायरस के व्यवहार, उभरते हुए स्वरूपों और वायरल लोड के साथ-साथ पुन: संक्रमण होने आदि विषयों की भी समीक्षा कर रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ की ओर से भी जल्द ही बूस्टर खुराक को लेकर मार्गदर्शन मिलने की संभावना है। देश में स्वास्थ्य और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को 10 जनवरी के बाद से अब तक कुल 86.87 लाख एहतियाती खुराक दी गई हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, लगभग तीन करोड़ ऐसे स्वास्थ्य और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी हैं, जिन्हें एहतियाती खुराक लगाई जा सकती है और जो इसके मापदंडों को पूरा करते हैं। इसके अलावा देश में 60 वर्ष की आयु से अधिक और सह-रुग्णता वाले करीब 2.75 करोड़ लोगों के होने का अनुमान है।
वैज्ञानिक तथ्यों-सबूतों के आधार पर हो निर्णय
उन्होंने कहा कि देश के बाहर किए गए कुछ अध्ययन से पता चला है कि बूस्टर सार्स-कोव2 के खिलाफ अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं, ऐसे अध्ययन भी हैं जो प्रारंभिक निष्कर्ष में तीसरी खुराक के कुछ ही हफ्तों बाद एंटीबॉडी के स्तर में गिरावट दिखाते हैं।
अधिकारी ने कहा कि समय की आवश्यकता है कि एक ऐसा टीका विकसित किया जाए जो न केवल इस गंभीर महामारी को बल्कि वायरस के संक्रमण को फैलने से भी रोक सके। ताकि हम इसके सामुदायिक प्रसार से बच सकें।
भारत में एहतियाती खुराक देने का क्रम काफी धीमा रहा है। केंद्र सरकार का चाहती है कि इस तरह के कोई भी फैसले पर वैज्ञानिक तथ्यों-सबूतों के माध्यम से आगे बढ़ा जाए। अतिरिक्त एहतियाती खुराक देने का निर्णय ओमिक्रॉन के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लिया गया था।
यह लंबे समय की रणनीति नहीं
हाल ही में यूएस की एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने किशोरों के लिए एहतियाती खुराक या बूस्टर डोज के लिए पात्रता मानदंडों में विस्तार किया था। हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि बूस्टर शॉट्स एक स्थायी दीर्घकालिक रणनीति नहीं हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ भी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि कोविड-19 के मूल टीकों की बूस्टर खुराक को दोहराव नए वैरिएंट के खिलाफ एक व्यवहार्य रणनीति नहीं है।