भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामले में लगातार बढ़ोतरी जारी है। कहीं पर दूसरी तो कही पर तीसरी लहर चल रही है। हालांकि कई देशों में इसकी रफ्तार कम हुई है, लेकिन भारत में हर रोज नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। जॉन्स हॉपकिन्स कोरोनावायरस संसाधन केंद्र के मुताबिक कोरोना के दैनिक मामलों में 10 प्रभावित देशों में भारत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। भारत में कोरोना संक्रमण के नए केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। देश में एक दिन में करीब पौने चार लाख तक नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। भारत के बाद दूसरे स्थान पर कोलंबिया है। यहां के भी हालात खराब हैं। भारत हर पहलू से दुनिया के प्रभावित 10 देशों में खराब स्थिति में है।
28 अप्रैल को दुनिया के 43% कोरोनो संक्रमण के नए मामले सिर्फ भारत में दर्ज किए गए हैं, यह आंकड़े खौफनाक और चिंता में डालने वाले हैं। देश में एक्टिव केस काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। साप्ताहिक औसत पॉजिटिव दर में भी इजाफा हो रहा है। राज्य सरकारों पर सही आंकड़े छिपाने के आरोप भी लग रहे हैं।
भारत में हर रोज बन रहे नए रिकॉर्ड
जॉन्स हॉपकिन्स कोरोना वायरस रिसोर्स सेंटर के अनुसार, भारत वर्तमान में 10 सबसे खराब प्रभावित देशों (दैनिक मामलों ) में से एक है। दूसरे नंबर पर कोलंबिया का स्थान है। जहां चीजें बदतर हो रही हैं। गुरुवार को भारत में कोरोना के 3.80 लाख नए मामले दर्ज किए गए। रिसोर्स सेंटर के अनुसार शहरों में अब भी अस्पताल और आईसीयू की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
एम्स डायरेक्टर बोले- कोरोना से डरने की जरूरत नहीं
गौरतलब है कि एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना भी एक सामान्य संक्रमण है और इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतने की आवश्यकता है। 85-90% लोगों में ये बुखार, जुकाम की तरह है और इसमें ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती है। घर पर ही लोग घरेलू नुस्खे, भाप और दवाई से भी ठीक हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि संक्रमित लोगों में से 10-15% मरीजों को अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ती है। उसमें 5 % से भी कम मरीजों को आईसीयू में या वेंटिलेटर पर रखा जाता है।
एम्स डायरेक्टर गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश के कुछ हिस्सों में दहशत पैदा कर दी है। खासकर महानगरों में तो लोग सहमे हैं, जिसमें दिल्ली भी शामिल है। यहां पर हर किसी को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, और ना ही हर किसी को रेमेडिसविर इंजेक्शन की आवश्यकता है।