आईसीएमआर ने जारी किए नए प्रोटोकॉल (फाइल फोटो)
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने यह देखने के लिए कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में कोरोना वायरस का संक्रमण हो रहा है या नहीं, त्वरित एंटीबॉडी-आधारित रक्त परीक्षण शुरू करने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए नया प्रोटोकॉल निर्धारित किया है। शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान निकाय ने क्लस्टर क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए एक नई रणनीति तैयार की है, जहां बड़ी संख्या में कोविड-19 के मामले सामने आ रहे हैं।
आईसीएमआर ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) के मामलों की निगरानी की जाएगी। मामलों में उछाल आने पर इनकी निगरानी की जाएगी और इन्हें सर्विलांस अधिकारी या अतिरिक्त जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जानकारी में लाया जाएगा।
आईसीएमआर के डॉक्टर आर गंगा खेड़कर ने कहा, 'हमने कई हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान की है जहां बड़ी संख्या में कोविड-19 के मामले सामने आ रहे हैं और यहां यह पता लगाने के लिए कि बीमारी क्षेत्र में फैल रही है या नहीं त्वरित एंटीबॉडी टेस्ट सबसे उपयुक्त हैं। इसके अलावा त्वरित एंटीबॉडी टेस्ट जल्द परिणाम देते हैं। यदि त्वरित एंटीबॉडी टेस्ट में कोई व्यक्ति पॉजिटिव आता है तो उसे 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन (एकांतवास) में रखा जाना चाहिए। पुष्टि के लिए उसका आरटी-पीसीआर टेस्ट भी करना चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'हमने स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिसके अनुसार सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता जो त्वरित एंटीबॉडी टेस्ट कर रहे हैं, उन्हें दस्ताने, मास्क और हेडकवर का उपयोग करना चाहिए। गले और नाक के स्वैब इकट्ठा करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को मानक राष्ट्रीय संक्रमण नियंत्रण दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।'
निर्देश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सावधानी बरतते हुए सभी आईएलआई व्यक्तियों को 14 दिनों के लिए होम क्वारेंटाइन (एकांतवास) में रखे जाने की सलाह दी जाती है। अस्पताल में आईएलआई व्यक्तियों का त्वरित एंटीबॉडी टेस्ट किया जाना चाहिए। अभी तक भारत में कोरोना संक्रमितों संख्या 3374 पर पहुंच गई है जबकि मृतकों की संख्या 77 हो गई है।