समाज हित में जरूरी है ज्यादा जांच : विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का दावा है कि जांच का दायरा बढ़ाने से संक्रमण की स्थिति और भी ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। दिल्ली एम्स के ही एक सामुदायिक मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर का मानना है कि ये काम बहुत पहले ही हर राज्य में शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन किट्स व लैब स्टाफ की पर्याप्त संख्या न होने के कारण दिक्कतें आई हैं। हालांकि अब, जब जांच का दायरा बढ़ रहा है तो मरीज की पहचान भी आसान होती जा रही है। समाज के बाकी लोगों की सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी भी है।
20 डिग्री तापमान से कम में रखें, तभी सही परिणाम देंगी रैपिड किट...
कुछ राज्यों ने शिकायत की है कि रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट से सटीक परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इस पर आईसीएमआर ने किट को 20 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में रखने का निर्देश दिया ताकि सटीक परिणाम मिलें। आईसीएमआर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने बताया, अभी तक यह पता नहीं चला है कि एंटीबॉडी टेस्ट कितना शक्तिशाली होगा? इसका इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि बीजीआर अमेरिका एफडीए लैब से मान्य प्राप्त किट्स हैं। ये ज्यादा तापमान पर काम नहीं कर पातीं।
पूर्वोत्तर में जंग हार रहा कोरोना
पूर्वोत्तर राज्यों में कोरोना हारता दिख रहा है। मणिपुर व अरुणाचल प्रदेश के कोरोना मुक्त होने के बाद असम भी इसी राह पर है। वहीं त्रिपुरा में हालात नियंत्रण में है। इन राज्यों ने न सिर्फ लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया, बल्कि कोरोना संदिग्धों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की।
असम और त्रिपुरा में बीते कुछ दिन से एक भी नया मरीज नहीं मिला है। असम में 34 मरीजों की पहचान हुई थी, जिनमें से 18 को छुट्टी मिल चुकी है। वहीं, 15 को भी जल्द छुट्टी मिलने की उम्मीद है। राज्य में सिर्फ एक मौत हुई है। त्रिपुरा में दो ही संक्रमित मिले थे और दोनों तेजी से ठीक हो रहे हैं।
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया, तब्लीगी जमात से कोरोना ने दस्तक दी थी। तेजी से लोगों की पहचान कर इन्हें समाज से अलग किया। फिर करीब 5000 लोगों की कोरोना जांच की गई। इनमें 34 कोरोना पॉजिटिव निकले।