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पिता ने लिव इन से जन्मी बच्ची के लिए मांगा संरक्षण, दिल्ली हाईकोर्ट ने गुवाहाटी अदालत जाने को कहा

Sun, 18 Aug 2019 02:46 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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delhi high court
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक पूर्व सैन्यकर्मी को असम में लिव इन रिलेशन से जन्मीं बच्ची का संरक्षण देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह याचिका उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है।

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उच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि बच्ची का जन्म असम में हुआ और वह फिलहाल अपने नाना नानी के संरक्षण में हैं, इसलिए याचिकाकर्ता राहत पाने के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है।

पूर्व सैन्यकर्मी के लिव इन रिलेशन से दो बच्चे हैं। उसके पार्टनर की गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के चलते 2015 में मौत हो गई थी। पार्टनर उस वक्त गर्भवती थी। इस रिश्ते से जन्मा बेटा पूर्व सैन्यकर्मी और उसकी पत्नी के साथ दिल्ली में है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति बृजेश सेठी की पीठ ने कहा कि चूंकि नाबालिग लड़की जिसके संरक्षण की मांग की जा रही है वह गुवाहाटी में रहती है, जो इस अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है इसलिए वह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर विचार नहीं कर सकती। 

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता जनवरी में अपने वकील के साथ बेटी से मिलने गया था और उसके संरक्षण की मांग की थी लेकिन बच्ची के रिश्तेदारों ने संरक्षण देने से इनकार कर दिया था। याचिका में कहा गया है कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके बाद पूर्व सैन्यकर्मी ने अपनी नाबालिग बच्ची के संरक्षण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत पाने के लिए गुवाहटी उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा।

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