मुंबई की एक अदालत ने भाजपा विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा और चार अन्य को पिछले साल सितंबर में कोविड -19 निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में बरी कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध को साबित करने में विफल रहा है। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (गिरगाम कोर्ट) नदीम ए पटेल ने 23 जून को लोढ़ा, मीनल पटेल, ज्योस्तना मेहता, विनल अंतरकर और सरिता पाटिल को बरी कर दिया।
लोढ़ा और चार अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा) और अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत अपराध दर्ज किए गए थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया था कि लोढ़ा और अन्य लोग बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के खिलाफ दक्षिण मुंबई में नागरिक निकाय के डी-वार्ड कार्यालय के बाहर नारे लगा रहे थे, जब कोरोना वायरस प्रतिबंध लागू थे।
उस समय पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और आदेश के बारे में जानकारी के बावजूद उन्होंने विरोध जारी रखा था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों, सभी पुलिसकर्मियों से जिरह की थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह एक तथ्य है कि घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई थी। इस घटना को कई लोगों ने देखा होगा। हालांकि, किसी भी स्वतंत्र गवाह से पूछताछ नहीं हुई। इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अभियोजन पक्ष द्वारा पेश और साबित नहीं की गई थी और बीएमसी के खिलाफ नारे लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए विशिष्ट शब्द की भी गवाहों ने पुष्टि नहीं की।