एचआईवी पीड़ित मरीजों की शादी के लिए एआरटी सेंटर ने जिम्मा उठाया है। लेकिन शादी में शर्त का अड़ंगा है। दरअसल, जितने भी लोगों ने विवाह के लिए एआरटी सेंटर में आवेदन किया है वे अपने ही धर्म और जाति में जीवनसाथी चाहते हैं। इसके चलते एक साल से इनके आवदेन प्रदेश के हर एआरटी सेंटर में नकारे जा रहे हैं।
एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में मंडल के करीब 1375 एचआईवी मरीज पंजीकृत हैं। इनमें 426 महिलायें, 56 बच्चे और 881 पुरुष हैं। इन एचआईवी पीड़ित में 867 एड्स से पीड़ित हैं।
अभी तक एआरटी सेंटर की ओर से पूरे प्रदेश में बरेली से छह पुरुषों के विवाह के लिए आवेदन भेजे गये हैं। लेकिन पिछले एक साल से इनके लिये कोई सुयोग्य लड़की नहीं मिल रही है।