जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के विश्लेषण के अनुसार कोरोना महामारी के मामले में भारत की स्थिति अभी भी बेल्जियम, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका जैसे देशों से बेहतर है। अगर प्रति एक लाख की आबादी पर मौत की बात करें तो बेल्जियम में यह आंकड़ा 214 है, इटली में 204, यूके में 191 और अमेरिका में 177 है। वहीं, भारत में प्रति एक लाख की आबादी पर होने वाली मौतों की संख्या केवल 18.01 है। वहीं, फ्रांस में यह आंकड़ा 159, स्वीडन में 138, स्विट्जरलैंड में 125, ऑस्ट्रेलिया में 117 और जर्मनी में 102 है।
आबादी के मुकाबले कहीं कम हैं मामले
यूनिवर्सिटी ने पूरी दुनिया में कोविड-19 महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित 20 राज्यों में मृत्युदर का विश्लेषण किया था। यह विश्लेषण कोरोना के हर 100 पुष्ट मामलों पर या प्रति एक लाख की आबादी पर होने वाली मौतों की संख्या बताता है। अगर कोरोना के मामलों की संख्या की बात करें तो करीब 136 करोड़ की आबादी वाले भारत में यह आंकड़ा दो करोड़ 44 लाख आठ हजार 132 है। वहीं, अमेरिका में कोविड-19 के कुल मामलों की संख्या तीन करोड़ 36 लाख 69 हजार 238 है। अमेरिका की जनसंख्या करीब 32 करोड़ है।
मृत्युदर कम और रिकवरी रेट है ज्यादा
राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना संक्रमण के मामलों में भारत में भले ही रोज नए रिकॉर्ड बन रहे हों लेकिन अच्छी खबर ये है कि देश में कोरोना वायरस के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में अब मामलों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। बेहद गंभीर दूसरी लहर के बावजूद देश में कोरोना से मृत्युदर एक फीसदी से कुछ ही ज्यादा है। इसका मतलब है कि लगभग 99 फीसदी कोरोना मरीज ठीक हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि देश में कोरोना संक्रमण से मरने की दर 1.12 फीसदी व ठीक होने की दर 98.88 फीसदी है।