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बड़ी उम्मीदें: पटना एम्स में भी कोविड-19 वैक्सीन का मानव ट्रायल शुरू, देशभर में 375 लोगों पर परीक्षण

Sat, 18 Jul 2020 07:06 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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भारत में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों के बीच अच्छी खबर सामने आई है। देश में कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हो गया है। देश के 12 बड़े अस्पतालों में कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण किया जा रहा है। बिहार के पटना एम्स अस्पताल और हरियाणा के रोहतक पीजीआईएमएस में वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हो चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने भी शनिवार को कोरोना से जंग में जीत की उम्मीद जताई। 

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पटना एम्स में मानव परीक्षण शुरू
बिहार के पटना एम्स में कोविड-19 वैक्सीन का मानव ट्रायल शुरू हो गया है। पिछले दो दिन में आठ लोगों को कोरोना वैक्सीन का डोज दिया गया है। पटना एम्स के निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि कुछ चुने हुए लोगों को एम्स में ट्रायल के लिए कोरोना दवा दी गई है। पहले चरण में 18 लोगों को वैक्सीन का डोज दिया जाएगा। इसके परिणान तीन महीने के बाद आएंगे। फिलहाल 54 लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल होगा।

वहीं, रोहतक पीजीआईएमएस के डॉक्टरों ने बताया कि क्लीनिक ट्रायल के पहले चरण के तहत तीन लोगों को टीका दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में छह महीने लगते हैं लेकिन अगले दो-तीन महीने में पैदा होने वाले एंटीबॉडी से टीके के असर और अगर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो उसके बारे में पता लगेगा। परीक्षण में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों की उम्र 30 से 40 साल के बीच है। अब 10 लोगों को यह टीका दिया जाएगा जिनकी नियमित आधार पर निगरानी की जाएगी। दूसरे चरण में और लोगों का पंजीकरण होगा तथा टीका की खुराक भी बढ़ाई जाएगी ।
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देशभर में 375 लोगों पर परीक्षण शुरू
भारत बायोटेक द्वारा विकसित किए जा रहे कोविड-19 रोधी टीके ‘कोवेक्सिन’ का मनुष्यों पर परीक्षण देशभर में 375 लोगों पर शुरू किया गया है। कंपनी के सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।सूत्रों ने कहा, भारत के पहले स्वदेश निर्मित कोविड-19 रोकथाम के टीके कोवेक्सीन का पहले चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरे देश में 15 जुलाई 2020 को शुरू हुआ था। यह भारत में 375 लोगों पर हो रहा बिना क्रम वाला (रैंडमाइज्ड), पूरी तरह गोपनीय (डबल ब्लाइंड) और प्रायोगिक औषधि नियंत्रित क्लीनिकल परीक्षण है।

जहां तक क्लीनिकल परीक्षण की बात है तो ‘डबल ब्लाइंड’ से आशय है कि ना तो मरीज को और ना ही अनुसंधानकर्ता को पता होता है कि किसे प्रायोगिक दवा दी जा रही है और किसका सामान्य इलाज किया जा रहा है। भारत बायोटेक को पिछले दिनों ही उसके कोरोना वायरस रोधी टीके कोवेक्सिन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने के लिए देश के दवा नियामक की मंजूरी मिली थी।

देश में इस समय कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सात टीके विकास के विभिन्न स्तर पर हैं जिनमें से दो को मनुष्य पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने की मंजूरी मिल चुकी है। इस महीने की शुरुआत में जाइडस कंपनी ने कहा था कि उसे टीके के मानव पर परीक्षण शुरू करने के लिए प्राधिकारियों से स्वीकृति मिल गई है।

डॉ हर्षवर्धन ने ट्वीट कर दी जानकारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने शनिवार को ट़्वीट किया, स्वदेशी कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हो गया है! कोरोना के खिलाफ जंग अब निर्णायक दौर में है। पिछले कई महीनों से कोरोना वैक्सीन के विकास के लिए जारी प्रयास के सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। हम जल्द ही इस महामारी पर पूरी तरह जीत प्राप्त कर लेंगे।
 


मानव परीक्षण में लगेंगे 90 दिन
देश में शुरू हुए वैक्सीन के पहले मानव परीक्षण में करीब एक महीना लगेगा। परीक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया के पास भेजा जाएगा। इसके बाद अगले चरण के परीक्षण की मंजूरी मिलेगी। सीधे तौर पर समझें तो वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के परीक्षण में करीब 90 दिन लगेंगे। 
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