डॉ. पांडा के अनुसार आईसीएमआर ने वायरस के ऐसे ही बदले हुए स्वरूप और उसके प्रभाव को जांचने-परखने और रोकने के लिए एक क्रोमिक मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल में रांच फैक्टर हैं। इन पांचों फैक्टर का एनालिसिस करके अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाला वायरस कितना खतरनाक है। डॉ. पांडा के मुताबिक क्रोमिक मॉडल गणितीय गणना के आधार पर तैयार किया गया मॉडल है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट इम्यूनिटी की क्षमता का आकलन करना शामिल है। आईसीएमआर ने इस मॉडल के माध्यम से देश में कोरोना वायरस की गंभीरता का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से निर्देशित किया है।
वह कहते हैं इस वक्त देश में ज्यादातर राज्य इसी मॉडल के आधार पर कोरोना वायरस की गंभीरता का आकलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस वक्त जो वायरस पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना है वह भी इसी गणना के आधार पर आंका जाएगा। डॉक्टर पांडा का कहना है कि इस मॉडल के आधार पर तैयार की गई ऑब्जर्वेशन को बचाव के लिए तैयार की जाने वाली योजनाओं में तब्दील किया जाएगा तो निश्चित तौर पर वायरस के खतरनाक परिणामों से बचा जा सकेगा।
हालांकि इन सबके बीच डॉ. पांडा ने देश में चल रहे टीकाकरण अभियान को और तेज करने के साथ-साथ लोगों को दूसरी खुराक लगवाने के लिए भी आगे आने के लिए कहा है। वह कहते हैं कि हमारे देश में अभी भी टीकाकरण की गति बहुत धीमी है। खासतौर से दूसरी खुराक के लिए लोगों में लापरवाही बढ़ रही है। उनका कहना है जो लोग तय समय पर दूसरी खुराक नहीं लगवा रहे हैं वह एक बड़े खतरे और बड़े संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। लोगों ने कोरोना वायरस से बचने के अनुरूप किए जाने वाले व्यवहार में भी लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। वह कहते हैं कि न लोग मास्क लगा रहे हैं और न ही शारीरिक दूरी का पालन कर रहे हैं।
समीरन पांडा कहते हैं कि ओमिक्रॉन वायरस को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की टीम पूरी तरीके से अलर्ट है। वह कहते हैं अभी तक अपने देश में इसका कोई भी केस सामने नहीं आया है। लेकिन विदेश से आने वालों खासतौर से दक्षिण अफ्रीका और उस महाद्वीप से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा जीनोम सीक्वेंसिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है।