कोरोना वायरस विदेशों में कैंसर मरीजों की मौत का कारण बन रहा है। भारत में भी अब ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल साइकोलॉजी समेत एक अन्य शोध में पता चला है कि बिना कैंसर कोरोना की चपेट में आने वालों की तुलना में आए उनकी मौत 1 महीने के भीतर हो गई। अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन और कनाडा में इस तरह के मामले सबसे अधिक देखे गए हैं। भारत में भी कैंसर मरीजों की मौत के मामले सामने आने लगे हैं।
अमेरिकन सोसायटी ने कैंसर के 928 मरीजों पर अध्ययन किया। जिसमें पता चला कि 50 फीसदी मरीजों को संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और 13 फीसदी की मौत हो गई। वैज्ञानिकों का दावा है कि परिणाम इससे भयावह भी हो सकते हैं जिसका आकलन अभी तक नहीं हुआ है। इसी तरह दूसरा शोध जो हाल ही में लैसेंट पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
इंग्लैंड के अलग-अलग तरह के कैंसर से पीड़ित 800 मरीजों पर अध्ययन किया गया, तो संक्रमण के कारण इनकी मृत्यु दर 28 फीसदी से अधिक थी। कैंसर मरीजों को वायरस से खतरा इसलिए कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि इन्हें इसके उच्च रक्तचाप समेत अन्य बीमारियां भी होती हैं।
कैंसर के इलाज में फेफड़ों पर भी होता है असर...
विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों के इलाज के दौरान उनके फेफड़ों पर भी असर पड़ता है। दवाओं की हाई डोज के चलते शरीर कमजोर भी होता है क्योंकि दवाओं से कैंसर कोशिकाओं के साथ दवाओं से स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान होता है। इसी कारण कैंसर का मरीज थोड़ी दूर चलता है तो थका हुआ महसूस करता है। अधिकतर मरीजों को सांस संबंधी तकलीफ भी होती है। इम्यूनिटी कमजोर होने से कोरोना ही नहीं वह दूसरी बीमारियों की भी चपेट में आ जाता है।
भारत में कैंसर मरीजों को रहना होगा सतर्क
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में 12 लाख नए कैंसर के मरीज मिले जबकि 7,84,800 कैंसर मरीजों की मौत हुई। भारत में स्तन, फेफड़े, पेट, कोलोरेक्टल और सर्वाकल कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं। यह सभी पांच कैंसर नए मिलने वाले कैंसर मरीजों का 49 फीसदी है। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि आने वाले 2 दशक में कैंसर मरीजों का ग्राफ दुनिया भर में तेजी से बढ़ेगा। सबसे अधिक खतरा कम और मध्यम आय वाले देशों को होगा, जहां कैंसर के 81 फीसदी नए मामले मिलेंगे।
घर से बाहर न निकले और तनाव ना लें
लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कैंसर सर्जन डॉक्टर आशीष सिंघल बताते हैं कि महामारी के दौरान कैंसर मरीज घर में कैद ही रहें। 99 फीसदी कैंसर मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है किसी तरह का तनाव ना लें और समय पर दवा लें। इलाज किसी स्तर पर बाधित नहीं होना चाहिए। क्योंकि इससे मुश्किल खड़ी हो सकती है। अन्य लोगों की तुलना में कैंसर मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसी स्थिति में अगर वह वायरस की चपेट में आएंगे, तो वायरस इसका फायदा उठाकर उनकी तकलीफ को बढ़ा सकता है। गंभीर परिस्थितियों में हालत जानलेवा भी हो सकती है।