खुद शोधकर्ता ने वीडियो में इस बात को कबूल किया है और अपने हाथ को भी दिखाया है। वीडियो में नजर आ रहा है कि टीम के सदस्य चमगादड़ के बेहद संक्रामक मल को शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनकर इकट्ठा कर रहे हैं। उस दौरान किसी ने पीपीई किट नहीं पहना है।यही नहीं वुहान लैब के अंदर स्टाफ बिना ग्लव्स के काम करता दिखा। ये लोग 'जिंदा वायरस' पर काम कर रहे थे और मास्क तक नहीं पहन रखा था। वह भी तब जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुरक्षा के लिहाज से ऐसी लैब के अंदर पीपीई किट को अनिवार्य किया है।
चमगाादड़ के काटने की बात स्वीकार की
वुहान लैब के शोधकर्ता ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि चमगादड़ के जहरीले दांत मेरे रबर के दस्ताने में घुस गए और ऐसा लगा जैसे मेरे हाथ में सूई घुस रही हो। इसके बाद वीडियो में एक शख्स के हाथ दिखाए जाते हैं जो चमगादड़ के काटने से सूज गए हैं। इसके बाद वीडियो में यह भी बताया जा रहा है कि इन चमगादड़ों में कई वायरस होने का खतरा है। वीडियो में कई बार रिसर्चरों को चमगादड़ों को नंगे हाथों पकड़े देखा जा सकता है।
यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है, जब डब्ल्यूएचओ की टीम कोरोना के स्रोत की जांच के लिए चीन में मौजूद है। चीन ने काफी टालमटोल के बाद जांच दल को अपने यहां आने और वुहान में जांच करने की अनुमति दी है।
चीन ने वीडियो को कर दिया सेंसर
यह वीडियो सबसे पहले चाइना सांइस एक्सप्लोरेशन सेंटर ने पोस्ट किया था, लेकिन बाद में उसे चीन ने सेंसर कर दिया। चीन की बैट वूमन वीडियो में कहती सुनाई पड़ रही हैं कि यह काम इतना खतरनाक नहीं है जितना लोग सोचते हैं। उन्होंने कहा कि यह सही है कि चमगादड़ में कई खतरनाक वायरस होते हैं, लेकिन इनके सीधे इंसान को संक्रमित करने का खतरा बहुत कम होता है।