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वो आत्मघाती कदम, जिनसे कोरोना वायरस से जंग में पिछड़ रहे हैं हम

Sat, 18 Jul 2020 12:10 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
भारत में कोरोना वायरस महामारी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों का पहले अनुमान था कि देश में जुलाई के चौथे सप्ताह में संक्रमित मरीजों की संख्या 10 लाख पार हो सकती है लेकिन पांच दिन पहले ही यह आंकड़ा पार हो चुका है। इसके साथ ही भारत वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला तीसरा देश बन गया है। एक से लेकर 16 जुलाई के बीच देश में पांच लाख से अधिक मामले मिले हैं। मामले बढ़ने की एक वजह लोगों में जागरुकता की कमी है। जिसके कारण कोरोना का विस्फोट हो रहा है और मामले बढ़ रहे हैं। शासन-प्रशासन जहां मामलों को नियंत्रित करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं वहीं लोग लापरवाही के चलते उनकी मेहनत पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि लोगों की किन लापरवाहियों के कारण भारत में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
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मास्क नहीं पहनना

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बिना मास्क के घूमते लोग - फोटो : amar ujala
सभी को पता है कि कोरोना के खिलाफ जंग के लिए मास्क पहनना कितना जरूरी है। इसके बावजूद बहुत से लोग बिना मास्क के दिखाई देते रहते हैं। उन्हें लगता है कि हमें कुछ नहीं होगा तो मास्क पहनकर फायदा क्या है। जबकि यह धारणा न केवल गलत है बल्कि खतरनाक भी है। सच्चाई यह है कि मास्क पहनने से आप काफी हद तक वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोक सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार लोगों से घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनने की अपील कर रही हैं। वहीं कुछ सरकारों ने मास्क न पहनने वालों पर जुर्माना भी लगाया हुआ है। इसके बावजूद लोग समझने को तैयार नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निर्देश के अनुसार, जहां संक्रमण ज्यादा है, वहां लोगों को हर हाल में मास्क पहनना चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगहों में भी मास्क पहनना बेहद जरूरी है। सभी स्वस्थ लोगों को तीन परतों वाला फैब्रिक मास्क पहनना चाहिए। जो लोग बीमार हैं, वो मेडिकल ग्रेड का मास्क पहनें।
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सामाजिक दूरी का पालन

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फाइल फोटो - फोटो : PTI
कोरोना वायरस से बचाव के लिए दो गज की दूरी कितनी जरूरी है इसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में करते रहते हैं। इसके अलावा डॉक्टर भी लगातार लोगों से दूरी बनाकर रखने की अपील करते रहते हैं। लेकिन गाहे-बगाहे हमें ऐसे मामले देखने को मिल जाते हैं जिसमें लोग इसकी धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई देते हैं। एक शोध में यह बात साबित हुई है कि सामाजिक दूरी से वायरस के प्रसार को कम किया जा सकता है। दो लोगों के बीच एक मीटर की दूरी कोरोना के खतरे को 82 प्रतिशत तक कम कर सकती है। डब्ल्यूएचओ ने भी दिशानिर्देश जारी कर कोरोना के खतरे से बचने के लिए सामाजिक दूरी को सबसे जरूरी उपाय बताया है। फिर भी लोग इसकी अनदेखी करते रहते हैं।

खराब रोग-प्रतिरोधक क्षमता

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coronavirus pandemic - फोटो : पीटीआई
रोग प्रतिरोधक क्षमता का काम शरीर को किसी बाहरी तत्व जैसे वायरस बैक्टीरिया परजीवी या बीमार करने वाले कारकों से बचाव करना होता है। वहीं कोरोना वायरस सबसे ज्यादा उन लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है और या फिर जो पहले से किसी बीमारी की चपेट में हैं। ऐसे लोगों को खासतौर से बेवजह घर के बाहर नहीं निकलने और अपनी ख्याल रखने की सलाह दी गई है। भारत में जिन लोगों की कोरोना से मौत हुई है उनमें ज्यादातर पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित थे। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता ठीक है वे वायरस से संक्रमित नहीं हो सकते हैं। एक शोध में कहा गया था कि भारत के लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। इसलिए सभी को अपनी दिनचर्या में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जिससे कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो और आप वायरस के खतरे से दूर रह सकें।
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नियमों का पालन न करना

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coronavirus - फोटो : PTI
वायरस के प्रभाव को देखते हुए सरकार ने नागरिकों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं। लोगों से उनका पालन करने की अपेक्षा की गई है लेकिन वे इसका उलट कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कोरोना संक्रमित या उसके लक्षण दिखाई देने के बावजूद कुछ लोग सार्वजनिक स्थलों पर घूमते, लोगों के संपर्क में आते हुए मिल जाते हैं। उनकी वजह से अनजाने में वायरस के प्रसार की एक चेन बन जाती है। इसके अलावा शादी या अंतिम संस्कार में लोगों के शामिल होने की एक संख्या निर्धारित की गई है। बावजूद नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती हैं। कुछ लोग अपने रसूख का इस्तेमाल नियमों को ताक पर रखने के लिए कर रहे हैं। वहीं कुछ घर में पार्टी आदि का आयोजन करके बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा कर जाने-अनजाने वायरस से संक्रमित हो रहे हैं या कर रहे हैं। 
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डब्ल्यूएचओ की चेतावनी

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तापमान जांचती स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
अमेरिका के फ्लोरिडा में एक दिन में संक्रमितों की संख्या में रिकार्ड तोड़ बढ़ोतरी होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस एडहेनम गेब्रसियस ने आगाह किया है कि कोविड-19 महामारी की स्थिति और भी खतरनाक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय तक जनजीवन पहले की तरह सामान्य नहीं हो पाएंगी। गेब्रसियस ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूरोप और एशिया में बहुत सारे देश इसे लेकर गलत दिशा में जा रहे हैं। इन दोनो महादेशों में स्थिति दिनों-दिन भयावह होती जा रही है। उन्होंने विश्व के कुछ नेताओं का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि महामारी कितनी खतरनाक स्थिति में पहुंचती जा रही है।
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तीन करोड़ तक हो सकते हैं मामले

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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
  • बंगलूरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोद्यार्थियों ने भी गणितीय मॉडल के आधार पर अगले वर्ष जनवरी तक भारत में मरीजों की संख्या करीब 3 करोड़ होने की आशंका व्यक्त की है।
  • इनके मुताबिक आगामी एक सितंबर तक देश में मरीजों की संख्या 35 लाख हो सकती है, जिनमें से सक्रिय मरीज 10 लाख और 1.40 लाख मौतें शामिल होंगी।
  • इसी तरह 1 नवंबर तक मरीजों की कुल संख्या 1.2 करोड़ होगी। साथ ही वायरस के चलते तब तक पांच लाख लोगों की मौत हो सकती है। 
  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में 34,884 नए मामले सामने आए हैं और 671 लोगों की मौत हुई है। 
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कई राज्यों की स्थिति लगातार खराब हो रही

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कर्नाटक, बिहार जैसे राज्यों को फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ा - फोटो : PTI
  • कुछ राज्य जो पहले कोरोना मुक्त हो गए थे वहां भी वायरस के लगातार नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
  • मामले बढ़ने की वजह से बंगलूरू और बिहार में पूरी तरह से लॉकडाउन लागू किया गया है।
  • वहीं उत्तर प्रदेश में पिछले हफ्ते से दो दिन शनिवार और रविवार के लिए लॉकडाउन किया जाता है। मामले बढ़ने की एक वजह परीक्षण में कमी है।
  • बहुत से राज्यों में पहले केवल कोरोना के लक्षण दिखाई देने वाले मरीजों का परीक्षण किया जाता था।
  • अब बहुत से राज्यों में एसिप्टोमैटिक (लक्षण दिखाई न देना) या फ्लू के मरीजों का भी परीक्षण किया जा रहा है। इसके कारण ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
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