कोविड -19 से अनुमानित मृत्यु दर इस आधार पर अलग-अलग होगी कि कितने लोग संक्रमित होते हैं। संक्रमित मामलों की संख्या वायरस के परीक्षणों के साथ जांच की संख्या के अनुसार अलग-अलग होगी या जरूरी मानदंडों पर पहचानी जाएगी।
भारत के पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. श्रीनाथ के रेड्डी ने कहा कि हम अभी भी इसे सटीक रूप से परिभाषित नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह बेहद ही छोटे और आम लक्षण के साथ सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें अधिक हल्के मामलों को शामिल होने की अधिक संभावना होती है। इसलिए मृत्यु दर कम होती है।
महामारी के प्रारंभिक चरणों में परीक्षण सीमित थे और मानदंड भी संकीर्ण थे। अब यह बड़ा हुआ है। यह समावेशी परीक्षण के साथ विस्तार पकड़ रहा है, जिससे कम मृत्यु दर दिख रही है। अध्ययन में पाया गया कि संक्रमण के बाद औसतन मृत्यु 17.8 दिनों में हुई और 24 दिनों के बाद मरीजों को अस्पताल छुट्टी दे दी गई। निदान किए गए मामले उम्र से काफी प्रभावित थे।
अध्ययन में कहा गया है कि कोविड -19 से संक्रमित 30 साल से कम उम्र के 100 लोगों में से एक को अस्पताल में भर्ती होने की संभावना थी। जबकि 80 वर्ष की आयु वाले संक्रमितों को 100 में 20 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं 60 साल वाले 11.8 फीसदी, 70 वर्ष वाले 16.6 फीसदी और 80 से ऊपर के 18.4 फीसदी संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।