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रिसर्च में नया खुलासाः कोरोना वायरस से मृत्यु दर अनुमान से कम

Wed, 01 Apr 2020 06:25 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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चीन से दुनिया भर में फैली कोरोना वायरस की बीमारी को लेकर एक नया तथ्य और आंकड़ा सामने आया है। करीब 70 हजार लैबों में कोरोना के मामलों की रिसर्च के बाद पता चला है कि चीन में इस बीमारी से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 1.38 प्रतिशत रही। ये पहले के अनुमानों से दो से लेकर आठ प्रतिशत तक कम है। हालांकि यह पिछली महामारी जैसे एच1एन1 इन्फ्लुएंजा की मृत्यु दर से अधिक है। 2009-10 में इस संक्रमण से मृत्य दर लगभग 0.02 प्रतिशत रही थी।  

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द लांसेट इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में सोमवार को प्रकाशित एक रिसर्च में बड़ी चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व की 50 से 80 प्रतिशत की आबादी कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आ सकती है। हालांकि सामाजिक दूरी, लॉकडाउन और मरीजों की बेहतर देखभाल से यह स्थिति संभल सकती है। हालांकि यह भी कहा गया है कि परिणाम महामारी के रूप में बदलते हैं और विकसित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप डेटा  भी बदला जाएगा।

इंपीरियल कॉलेज लंदन, क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी लंदन और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार कोविड-19 के संक्रमितों की मृत्यु दर 1.38 प्रतिशत है। 70 हजार 117 प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के अनुसार चीन के वुहान में जहां से यह बीमारी फैली, वहां 689 सकारात्मक मामलों का पूरी तरह से निदान किया गया।
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मृत्यु की दर उम्र के साथ भिन्न नजर आई।  80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए यह कम से कम 0.0016 से लेकर 7.8 प्रतिशत तक है। पिछले अध्ययनों ने अनुमान लगाया था कि 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की मृत्यु दर 8 से 36 प्रतिशत के बीच होगी। कोविड-19 की पुष्टि वाले मामलों में मृत्यु का पिछला अनुमान दो प्रतिशत से आठ प्रतिशत तक था। वहीं, समग्र संक्रमण से होने वाली मौतों का अनुमान 0.2 से 1.6 फीसदी के बीच रहा।  

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ठीक हुए मामले मामले उम्र से प्रभावित

कोविड -19 से अनुमानित मृत्यु दर इस आधार पर अलग-अलग होगी कि कितने लोग संक्रमित होते हैं। संक्रमित मामलों की संख्या वायरस के परीक्षणों के साथ जांच की संख्या के अनुसार अलग-अलग होगी या जरूरी मानदंडों पर पहचानी जाएगी।

भारत के पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. श्रीनाथ के रेड्डी ने कहा कि हम अभी भी इसे सटीक रूप से परिभाषित नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह बेहद ही छोटे और आम लक्षण के साथ सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें अधिक हल्के मामलों को शामिल होने की अधिक संभावना होती है। इसलिए मृत्यु दर कम होती है।

महामारी के प्रारंभिक चरणों में परीक्षण सीमित थे और मानदंड भी संकीर्ण थे। अब यह बड़ा हुआ है। यह समावेशी परीक्षण के साथ विस्तार पकड़ रहा है, जिससे कम मृत्यु दर दिख रही है। अध्ययन में पाया गया कि संक्रमण के बाद औसतन मृत्यु 17.8 दिनों में हुई और 24 दिनों के बाद मरीजों को अस्पताल छुट्टी दे दी गई। निदान किए गए मामले उम्र से काफी प्रभावित थे।

अध्ययन में कहा गया है कि कोविड -19 से संक्रमित 30 साल से कम उम्र के 100 लोगों में से एक को अस्पताल में भर्ती होने की संभावना थी। जबकि 80 वर्ष की आयु वाले संक्रमितों को 100 में 20 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं 60 साल वाले 11.8 फीसदी, 70 वर्ष वाले 16.6 फीसदी और 80 से ऊपर के 18.4 फीसदी संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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