इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने BS4 वाहनों की बिक्री की समयसीमा 31 मार्च, 2020 तय की थी। फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने कोरोना वायरस फैलने और अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच उच्चतम न्यायालय से इस समयसीमा को बढ़ाने की अपील की थी, जिसपर शीर्ष अदालत ने यह फैसला दिया।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों को लिखे पत्र में कहा है, "संबंधित राज्य-संघ शासित प्रदेशें के परिवहन विभाग को उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना है।"
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने शुक्रवार को इस मामले पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई की थी। पीठ ने स्पष्ट किया था कि दिल्ली-एनसीआर में एक अप्रैल, 2020 से BS4 वाहनों की बिक्री नहीं हो सकती।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा था कि BS4 वाहनों के बिना बिके हुए स्टॉक में से सिर्फ 10 फीसदी वाहन ही इन 10 दिन की अवधि के दौरान बेचे जा सकते हैं।
Federation of Automobiles Dealers Association (FADA), फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) और Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM), सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने BS4 वाहनों की बिक्री के लिए 31 मार्च की समयसीमा बढ़ाने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। FADA ने तर्क दिया कि पहले तो ऑटो सेक्टर में मंदी और दूसरा कोरोनोवायरस महामारी के कारण शोरूम में लोगों के कम आने की वजह से, 15,000 यात्री कारों, 12,000 वाणिज्यिक वाहनों, 7 लाख दोपहिया वाहनों की बिक्री दांव पर लगी हुई है।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि BS4 वाहनों की बिक्री की समयसीमा बढ़ाने और पर्यावरण पर बोझ डालने का कोई मतलब नहीं है। अदालत ने कहा, "हमें बलिदान करना सीखा चाहिए, देश के पर्यावरण के लिए कुछ करना चाहिए, सहानुभूति पैदा कीजिए... हम कारोबार और डीलरों के मनोविज्ञान को समझते हैं... आप कोरोना वायरस के चलते मार्च में कुछ दिनों के लिए हुए लॉकडाउन का फायदा उठाना चाहते हैं।"
यह अनुमान लगाया गया है कि भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के कारण लगभग 13,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये का अनुमानित राजस्व नुकसान होने की संभावना है। वर्तमान में, अकेले दोपहिया उद्योग में 4,600 करोड़ रुपये की BS4 इन्वेंट्री है, जबकि डीलरों के पास लगभग 8,35,000 बिना बिकी हुई यूनिट्स बची हुई हैं। इसके अलावा, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने पहले ही अनुमान लगाया है कि उत्पादन रुका होने के कारण हर दिन कम से कम 2300 करोड़ रुपये नुकसान होगा।