कोरोना वायरस महामारी से जूझने के लिए बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर सिस्टमों की आवश्यकता के बीच केरल के मेडिकल छात्रों ने एक नई उम्मीद जगाई है। तिरुवनंतपुरम के श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों ने एक आपातकालीन वेंटिलेटर सिस्टम बनाया है, जो बेहद कम खर्च में काम करता है।
केंद्र सरकार के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के तहत संचालित इस संस्थान के छात्रों ने अपने इस वेंटिलेटर सिस्टम का एक प्रोटोटाइम भी तैयार किया है। इसके उत्पादन के लिए बंगलूरू की विप्रो 3डी कंपनी से करार किया गया है।
यह सिस्टम आर्टिफिशियल मैनुअल ब्रीदिंग यूनिट (एएमबीयू) पर आधारित है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका आकार है। इस उपकरण को हाथ में उठाया जा सकता है। इसके लिए एएमबीयू बैक या एक बैग-वॉल्व-मास्क (बीवीएम) को हाथ में उठाकर सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे मरीज को पॉजीटिव प्रेशर वेंटिलेशन के जरिये राहत दे सकता है।
संस्थान की निदेशक डॉ. आशा किशोर ने बताया कि यह तकनीक महज एक सप्ताह में तैयार की गई है। वैश्विक स्तर पर कोविड-19 महामारी लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है। ऐसे हालात में यह आविष्कार बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।