कोवैक्सीन
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के सहयोग से विकसित भारत बायोटेक का स्वदेशी टीका है कोवैक्सीन
- सामान्य तापमान पर वैक्सीन का कम से कम एक हफ्ते तक भंडारण किया जा सकता है।
- मानव परीक्षण में इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया।
- तीन हफ्ते के अंतराल पर दो खुराक देने पर वैक्सीन में मौजूद वायरल प्रोटीन प्रतिरोधक तंत्र को संक्रमण से लड़ने में सक्षम बना देते हैं।
- 295 रुपये प्रति खुराक तय की कीमत कंपनी ने भारत सरकार के लिए, कुल 55 लाख खुराक में से 16.5 लाख मुफ्त में देने का फैसला किया है।
बनने से टीकाकरण केंद्र पहुंचने तक का सफर
-30 जून 2020 : भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) ने पहले स्वदेशी टीके कोवैक्सीन के मानव परीक्षण की मंजूरी दी।
-जुलाई 2020 : एम्स (दिल्ली-पटना) और पीजीआईएमएस (रोहतक) जैसे संस्थानों में कोवैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू हुआ।
-23 अक्तूबर 2020 : भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के पहले-दूसरे दौर की आजमाइश में पूर्ण रूप से सुरक्षित मिलने का दावा किया।
-16 नवंबर 2020 : कंपनी ने तीसरे दौर का परीक्षण शुरू किया, ब्राजील को वैक्सीन और तकनीक हस्तांतरण की पेशकश भी की।
-07 दिसंबर 2020 : भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी मांगी।
-03 जनवरी 2021 : डीजीसीआई ने आपात स्थितियों में सीमित प्रयोग की इजाजत दी।
-13 जनवरी 2021 : 11 भारतीय शहरों में कोवैक्सीन की पहली खेप की आपूर्ति की गई।
कोवैक्सिन दो खुराकों वाली वैक्सीन है, यानि ये दोनों खुराकों के बाद कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ इम्युनिटी पैदा करती है। हर खुराक में 0.5ml वैक्सीन दी जाएगी और दोनों खुराकों के बीत चार हफ्ते का अंतराल होगा। वैक्सीन दोनों खुराकें दिए जाने के 14 दिन बाद असर दिखाना शुरू करेगी। भारत में वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली है और अभी इसे 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही दिया जाएगा।