चीन के वुहान शहर में फैलने के बाद पूरी दुनिया को महामारी की आग में झोंकने वाले कोरोना वायरस से भारत भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस दौरान देश ने ऐतिहासिक लॉकडाउन देखा। 24 मार्च 2020 में पीएम मोदी ने इसका एलान किया था। अब दोबारा केस बढ़ने के कारण देश के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन का सिलसिला शुरू हो गया है। आइये जानते हैं पिछले साल के लॉकडाउन की कहानी तारीखों की जुबानी।
वुहान में कोरोना वायरस का पहला केस मिलने के करीब छह माह बाद भारत में इस महामारी ने दस्तक दी थी। देखते-देखते यह देश के अमूमन सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच गई और छह लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो गए। महामारी से बचाव के लिए दुनिया के कई देशों ने लॉकडाउन को उपयुक्त तरीका माना, ताकि लोग घरों में रहें और संक्रमण के शिकार न हों।
भारत ने भी लॉकडाउन को उचित माना, क्योंकि वह दुनिया के चार सर्वाधिक संक्रमित शहरों में शामिल हो गया था। हालांकि महामारी ने लाखों देशवासियों का अपने प्रियजनों से विछोह कराया तो लॉकडाउन ने उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ दी। देश की अर्थव्यवस्था पर भी अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडराया। संकट के दौर में देश के करोड़ों लोगों की मदद के लिए देशवासियों ने अपने-अपने स्तर पर हाथ भी बढ़ाया।
साल भर में बदले हैं हालात, पर अब भी नाकाफी
साल भर में हालात काफी बदले हैं। अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। धंधे-रोजगार रफ्तार पकड़ रहे हैं, कोरोना का टीकाकरण शुरू हो चुका है, लेकिन नहीं थम रहा है तो संक्रमण। साल भर बाद मार्च 2021 में देश में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में लॉकडाउन व नाइट कर्फ्यू लगाया जाने लगा है। गनीमत है कि अभी देशव्यापी लॉकडाउन के आसार नहीं हैं।
थोड़ी सी समझदारी व सुरक्षा से महामारी से खुद व देश को बचाया जा सकता है। 20 मार्च 2021 तक देश में कोरोना से कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,15,55,284 हो गई है तो 1,59,558 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। हालांकि 1,11,07,332 लोग इस महामारी से उबर चुके हैं, लेकिन अब भी 2,88,394 सक्रिय केस हैं।