देश में कोरोना की तीसरी लहर का पीक आने के एक महीने बाद ही नए मामले करीब 96 फीसदी तक घट गए हैं। दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर में कोरोना के मामलों में भी तेजी से गिरावट देखी जा रही है। राज्यों में भी कोरोना संक्रमण के मामले लगातार कम हो रहे हैं और पाबंदिया भी धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं। संक्रमण कम होने का असर अब देश के अस्पतालों में भी नजर आने लगा है। अधिकांश अस्पतालों में कोविड संक्रमित मरीजों के पहुंचने की संख्या लगातार कम होती दिखाई दे रही है।
कोविड संक्रमण के कम होने का असर देश के अस्पतालों पर भी दिखाई देने लगा है। अस्पतालों में कोविड संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। मरीजों के उपचार के लिए बनाए गए कोविड वार्ड फिलहाल खाली नजर आ रहे हैं। इधर, दिल्ली सरकार से जुड़े सूत्रों कहना है कि दिल्ली सरकार जल्द ही सभी अस्पतालों को सभी कोविड बेड को सामान्य बेड में तब्दील करने का फैसला ले सकती है। हालांकि ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि मौजूदा संक्रमण का क्या रुख रहता है और कोई नई लहर आने की आशंका है भी या नहीं।
राजधानी दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में कोविड मरीजों के इलाज के लिए एक विशेष विभाग बनाया गया है। जहां दो हफ्ते पहले तक 60 कोविड मरीज थे। अब इस वार्ड में केवल 15 ही कोविड मरीज है। फिलहाल अस्पताल में संक्रमित मरीजों के लिए 750 बेड की सुविधा की गई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में आने वाले आमतौर पर गंभीर मरीज ही होते हैं। लेकिन फिलहाल मामलों में कमी देखी जा रही है। हमारे पास आईसीयू में केवल सात से आठ ही मरीज हैं। जहां तक कोविड बेड की संख्या को कम करना का प्रश्न है तो यह फैसला सरकार को करना है।
देश में कोरोना के मामलों में कमी आ रही है। इस बार आई कोरोना की लहर भी पिछली दोनों लहरों की तुलना में हल्की रही। देश के हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना को लेकर अभी कुछ भी साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, फिलहाल किसी नई लहर की आशंका कम है, लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि अब कभी कोरोना की कोई लहर नहीं आएगी। क्योंकि यह वायरस लगातार खुद में बदलाव करता रहता है। ऐसे में दुनिया के किसी भी इलाके में वायरस म्यूटेट होकर नए वैरिएंट को जन्म दे सकता है। इसलिए अभी कुछ महीने कोरोना के पैटर्न पर नजर रखनी होगी। उसके बाद ही कहा जा सकेगा कि महामारी एंडेमिक बनेगी या नहीं।