कुन्नूर में सैन्य हेलीकॉप्टर हादसे के बाद जब बुरी तरह घायल सेना के एक अधिकारी ने घटनास्थल पर पहुंचे शिवकुमार से थोड़ा पानी मांगा तो उसे पता नहीं था कि यह शख्स देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत थे। ऐसा दावा किया है सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार ने जो दुर्घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में से एक थे। यहां एमआई -17 वीएच बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें जनरल रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 13 लोगों की मौत हो गई थी।
शिवकुमार का दावा, हेलिकॉप्टर से तीन लोग कूदे थे
शिवकुमार ने कहा कि हादसे के बाद उनके एक रिश्तेदार का फोन आने के बाद वह तुरंत मौके पर पहुंचे। हेलिकॉप्टर पहले ही आग पकड़ चुका था जिसका मतलब था कि किसी को भी बचाया नहीं जा सकता। शिवकुमार ने दावा किया कि हेलिकॉप्टर से तीन लोग कूदे, यहां पहुंचे लोग हादसे में घायल लोगों को बचाने के लिए संसाधन ढूंढ़ने लगे।
जनरल रावत ने मुझसे पानी मांगा था
शिवकुमार ने दावा किया, हमने देखा कि उनमें से तीन जीवित थे। हमने उन्हें ले जाने के लिए कंबल और अन्य उपलब्ध चीजों इस्तेमाल किया, वहां एक पुलिस निरीक्षक भी आया। जब हम घायलों को वहां से ले जाने की कोशिश में लगे थे, मैंने दूसरे व्यक्ति को शांत और आराम से रहने के लिए कहा। फिर उन्होंने मुझसे कुछ पानी मांगा। लेकिन मुझे लगा कि जब तक मैं उनके लिए पानी लाता, उतने समय में हम उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जा सकते थे।
बाद में पता चला कि वह जनरल रावत थे
उन्होंने कहा कि तीसरे व्यक्ति ने बचाव दल की बातें सुनी लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सका। बाद में सेना के एक अधिकारी ने शिवकुमार को जनरल रावत की एक तस्वीर दिखाई और बताया कि वह कौन थे। शिवकुमार ने कहा कि तब मैं परेशान हो गया कि मैं देश के इतने अहम व्यक्ति को तुरंत पानी नहीं दे सका। बाद में जनरल रावत का सारा सामान बरामद कर लिया गया। शिवकुमार ने कहा कि पुलिस और रक्षा अधिकारी पहले ही उनसे पूछताछ कर चुके हैं।