मशीन खरीदने और किसान संगठनों को कस्टमर हायरिंग सेंटर बनाने के लिए 50 से 75 फीसदी तक सब्सिडी मिलेगी। पराली निस्तारण के लिए शोध करने वाले कृषि संस्थानों को आर्थिक सहायता मिलेगी। पराली का ईंधन और कोयला आधारित संयंत्रों के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा।
पराली जलने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अभी से प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए चार राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। सरकार किसानों को जागरूक करने के लिए पराली के उचित निस्तारण को बढ़ावा देगी।
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मशीन खरीदने और किसान संगठनों को कस्टमर हायरिंग सेंटर बनाने के लिए 50 से 75 फीसदी तक सब्सिडी मिलेगी। पराली निस्तारण के लिए शोध करने वाले कृषि संस्थानों को आर्थिक सहायता मिलेगी। पराली का ईंधन और कोयला आधारित संयंत्रों के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा।
अब तक 1.40 करोड़ किसानों का पंजीकरण
सरकार ने किसानों के लिए फार्म नामक (मशीनरी सॉल्यूशन) एप बनाया है। इस पर अब तक करीब 1.40 करोड़ किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। चारों राज्यों में 39,391 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हो चुके हैं। किसानों को धान के बजाय वैकल्पिक फसल उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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पिछले साल 82533 जगह जली पराली
पिछले साल 15 सितंबर से 30 नवंबर तक देशभर में 82,533 जगह पराली जलने के मामले सामने आए। इनमें पंजाब के 71,304 हरियाणा में 6,987 और उत्तर प्रदेश के 4,242 मामले शामिल हैं।
पांच वर्षों में पंजाब को मिले सबसे अधिक रुपये
केंद्र सरकार ने पांच वर्षों में अब तक पराली को जलने से रोकने के लिए 2440 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सबसे अधिक पंजाब को 1149.62 करोड़ रुपये दिए गए। हरियाणा को 693.25 करोड़, उत्तर प्रदेश को 533.67 करोड़ और दिल्ली को 4.52 करोड़ रुपये मिले। अन्य एजेंसियों को 61.01 करोड़ रुपये दिए गए।