एनडीआरएफ की कब हुई शुरुआत?
2006 राष्ट्रीय आपदा मोचन बल(एनडीआरएफ) का गठन किया गया था। इसकी 12 बटालियनों में हर एक में 1,149 कर्मी हैं और सभी प्रकार की आपदाओं से निपटने में सबसे आगे हैं। इन बटालियनों को देशभर में रणनीतिक ठिकानों पर तैनात किया गया है। साथ ही, अन्य शहरों में 28 क्षेत्रीय केंद्र हैं। प्रत्येक बटालियन में 45 जवान समेत 18 विशेषज्ञों की टीम है। एनडीआरएफ के पास हर तरह की आपदाओं से निपटने के लिए अंतररराष्ट्रीय मानकों के 310 प्रकार के उपकरण हैं।
कहां-कहां हैं तैनात?
एनडीआरएफ की बटालियन देश के 9 विभिन्न स्थानों पर तैनात रहती है। ऐसे स्थानों पर जहां आपदाओं के आने की संभावना ज्यादा रहती है एनडीआरएफ की बटालियन उस जगह के पास रखी जाती है। राज्य अधिकारियों की मंजूरी से यह बल किसी आने वाली आपदा की पूर्व सूचना मिलते ही प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा दिए जाते हैं, जिससे आने वाली मुसीबत से प्रभावित लोगों की जान माल की रक्षा की जा सके।
एनडीआरएफ का प्रदर्शन
एनडीआरएफ ने इन 12 सालों के दौरान बाढ़ और अन्य आपदाओं से घिरे साढ़े पांच लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर सकुशल पहुंचाया। एनडीआरएफ आज आधुनिक युग की हर तरकीब और तकनीक के साथ हर तरह की आपदाओं में बचाव कार्य करने में सक्षम है। विशेषज्ञों के मुताबिक एनडीआरएफ आज देश में एक विशेषज्ञ बल बन चुका है जो आणविक और रासायनिक आपदाओं समेत आधुनिक युग की हर तरह की चुनौतियों से निपटने में यह सक्षम है।
इसके लिए दल की सभी 12 बटालियनों में नौ विशेषज्ञों के दल शामिल किए गए हैं। इन विशेषज्ञों को विदेश में उच्च स्तर का प्रशिक्षण मिला हुआ है और ये गहरे समुद्र और आग की घटनाओं को छोड़कर हर तरह की चुनौतियों के बीच बचाव कार्य में सक्षम रहते हैं। अभी मानसून का मौसम है और इसके मद्देनजर 26 राज्यों में 57 स्थानों पर 74 टीमें तैनात हैं, जो कहीं भी आपदा की सूचना मिलने पर कम से कम समय में पहुंचकर फौरन राहत कार्य चला सकती हैं।
एनडीआरएफ के बचाव अभियान
अभी तक एनडीआरएफ ने दो हजार से ज्यादा अभियान चलाये हैं। एनडीआरएफ ने 2006 में अपनी स्थापना से लेकर इस साल जून 2018 तक 2095 अभियान चलाए हैं। इनमेंं आपदाओं में घिरे 1,14,492 लोगों की जानें बचाई है, बाढ़ एवं अन्य आपदाओं से घिरे 5,52,857 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और 3,352 शवों को निकाला है।
कितने लोग को हुआ फायदा
एनडीआरएफ के अभियान से 51 लाख 75 हजार से ज्यादा लोगों को फायदा हुआ है। एनडीआरएफ के अधिकारियों की मानें तो आपदा से परे शांतिकाल में बल ने 5,268 सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम किए। इससे 51 लाख 75 हजार 537 लोग लाभान्वित हुए। स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 1524 कार्यक्रम किए गए जिसमें 6,44,225 छात्र-छात्राओं ने आपदा आने की स्थिति में इससे निपटने के गुर सीखे। इसी तरह 1,687 आपदा परिचय कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें लोगों को जागरूक किया गया। इसके अलावा 1,714 कृत्रिम अभ्यास 'मॉक एक्सरसाइज' आयोजित किए गए, जिसमें 8,07,307 लोगों ने आपदा से निपटने के गुर सीखे। विशेषज्ञों का कहना है कि आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उनसे पैदा होने वाले संकट को रोका जा सकता है।
एनडीआरएफ के पास है विश्वस्तरीय उपकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीआरएफ की टीम पूरी तरह से आत्मनिर्भर है। वह किसी आकस्मिक आपदा की सूचना मिलने के 30 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना हो सकती है। इनके पास त्वरित कार्रवाई करने के लिए विश्वस्तरीय उपकरण हैं जो ड्रोन, यूएवी जैसी प्रौद्योगिकी और ट्विटर, व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के मामले में भी लक्ष्य को साधने में पूरी तरह से तत्पर हैं। भारत में भूकंप, बाढ़ और भवन गिरने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश को मानव-जनित और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
इन बिंदुओं से समझें एनडीआरएफ का काम
1. मानवीय और प्राकृतिक आपदा के दौरान विशेषज्ञ मदद उपलब्ध करना, जिससे बचाव एवं राहत कार्य का प्रभावी ढ़ंग से हो सके।
2. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल आपदाओं के दौरान चलाए जाने वाले राहत कार्यों में अधिकारयों की मदद में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तैनाती संभावित आपदाओं के दौरान भी की जाती है।
4. आपदाओं में बचाव या राहत कार्य के दौरान अन्य संलग्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर यह बल बचाव या राहत कार्य को पूरा करता है।
5. एनडीआरएफ की सभी बटालियन तकनीकी दक्षता से युक्त हैं। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के साथ-साथ यह बल अपनी चार टुकड़ियों के माध्यम से रेडियोलॅाजिकल,जैविक,नाभिकीय और रासायनिक आपदाओं से निपटने में भी सक्षम है।