केंद्र सरकार ने घरेलू सिलेंडर पर 200 रुपये घटाकर आम नागरिकों को राहत दी है। लेकिन सरकार के इस कदम की कांग्रेस पार्टी ने तीखी आलोचना की और इसे एक चुनावी स्टंट बताया। वहीं, अब कांग्रेस ने बुधवार को मनरेगा श्रमिकों के बकाए को लेकर सरकार सीधा हमला किया है और मनरेगा श्रमिकों के बकाया भुगतान जारी करने की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार मनरेगा योजना के लाभ से लोगों को वंचित रखने के लिए आधार और प्रौद्योगिकी का हथियार के रूप में उपयोग कर रही है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जारी किया बयान
कांग्रेस ने कहा कि सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से लोगों को वंचित रखने के लिए आधार और प्रौद्योगिकी का हथियार के रूप में उपयोग बंद करना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्विटर पर पार्टी की और से एक बयान जारी किया है।
साथ ही जयराम रमेश ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग है कि मोदी सरकार को सबसे कमजोर नागरिकों को मनरेगा के लाभ से वंचित करने के लिए आधार और टेक्नोलॉजी को हथियार बनाना बंद करना चाहिए, मनरेगा श्रमिकों के बकाए का भुगतान करना चाहिए और पारदर्शिता को बेहतर करने के लिए इसके स्थान पर ओपन मस्टर रोल और सोशल ऑडिट लागू करना चाहिए।
कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) के माध्यम से मनरेगा के लिए भुगतान अनिवार्य करने की समयसीमा पांचवीं बार 31 दिसंबर, 2023 तक बढ़ा दी है। यह अपरिहार्य हो गया क्योंकि चार बार समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद, कुल 26 करोड़ जॉब कार्ड धारकों में से 41.1 फीसदी अभी भी भुगतान के इस तरीके के लिए अयोग्य हैं।
मनरेगा के प्रति प्रधानमंत्री का तिरस्कार सर्वविदित है
जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने शुरू में किसी भी और समयसीमा विस्तार से इनकार कर दिया था क्योंकि चौथे विस्तार की अवधि 31 अगस्त को पूरी हो रही थी। आगे बोले कि मनरेगा के प्रति प्रधानमंत्री का तिरस्कार सर्वविदित है। फिर भी मोदी सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा की ओर रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ा और अब भी जारी ग्रामीण संकट के कारण, इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रमिकों ने मनरेगा के तहत काम की मांग की है।
आगे कहा कि काम मांगने वाले सभी लोगों को मजदूरी देने की अपनी कानून-अनिवार्य जिम्मेदारी से बचने के लिए मोदी सरकार ने पारदर्शिता और दक्षता में सुधार के नाम पर, मनरेगा श्रमिकों को बार-बार काम या मजदूरी देने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के अपने अनुमान के अनुसार, 2.6 करोड़ से अधिक सक्रिय श्रमिकों को एक सितंबर, 2023 से उनके कानूनी रूप से अनिवार्य वेतन का भुगतान नहीं किया गया और इसमें वे करोड़ों श्रमिक शामिल नहीं हैं जिनके जॉब कार्ड विभिन्न त्रुटियों के कारण सूची से हटा दिए गए हैं।
श्रमिकों के विलंब भुगतान मुआवजे की एक बड़ी राशि अभी तक जारी नहीं की गई
जयराम रमेश ने अखबार का हवाला देते हुए कहा कि बार-बार मांग के बावजूद, श्रमिकों के विलंब भुगतान मुआवजे की एक बड़ी राशि अभी तक जारी नहीं की गई है, न ही मोदी सरकार ने इसे स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि आधार को यूपीए सरकार ने नागरिकों के लिए सामाजिक कल्याण लाभों तक पहुंच को आसान बनाकर उन्हें सशक्त बनाने के एक उपकरण के रूप में पेश किया था।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने, विशेष रूप से मनरेगा के मामले में और जल्द ही पेंशन और अन्य सामाजिक कल्याण लाभों के साथ, इसे नागरिकों को उनके गारंटीशुदा अधिकारों से बाहर करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। आधार को संप्रग सरकार ने सामाजिक कल्याण लाभों तक पहुंच को आसान बनाकर नागरिकों को सशक्त बनाने के एक उपकरण के रूप में पेश किया था। मोदी सरकार ने विशेष रूप से मनरेगा के मामले में और जल्द ही पेंशन और अन्य सामाजिक कल्याण लाभों के साथ, इसे नागरिकों को उनके गारंटीशुदा अधिकारों से बाहर करने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।