कांग्रेसियों ने शनिवार को सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बैनर लगाकर एक और विवाद खड़ा कर दिया। इस बैनर में ‘अच्छे दिन एक्सप्रेस’की आड़ में पीएम के वादे पर तंज कसा गया है। हालांकि, बैनर लगने के कुछ देर बाद ही नगर निगम के अफसर उसे उतरवाने लगे।
बैनर फट गया और इससे नाराज कांग्रेसी निगम अफसरों से भिड़ गए। उनकी अफसरों के साथ हाथापाई भी हुई। कांग्रेस नेता अभिन्न वार्ष्णेय, इरशाद उल्ला और रजत अरोरा की ओर से सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे पर लगाए गए बैनर में ‘अच्छे दिन एक्सप्रेस’को एक जुमला बताया गया है। तंज कसते हुए बैनर पर लिखा गया है कि प्लेटफार्म नंबर एक पर आने वाली ‘अच्छे दिन एक्सप्रेस, जो अपने साथ बिजली, पानी, मकान, रोजगार, चाइना से जमीन, भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त भारत, सस्ती दाल आदि साथ लाने वाली थी, अब नहीं आएगी।
इस ट्रेन का मार्ग जुमले लफाज स्टेशन की ओर कर दिया गया है। ट्रेन की खबर 2019 में दी जाएगी। तब तक नमो-नमो का जाप जारी रखें’। अंत में लिखा है कि यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए हमें कोई खेद नहीं है। यह विवादित बैनर शनिवार को दिन में 11 बजे जैसे ही सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे पर लगाया गया, वैसे ही नगर निगम के कर निर्धारण अधिकारी उसे हटाने पहुंच गए।
उसी वक्त मुख्य सचिव दीपक सिंघल को भी सिविल लाइंस में निरीक्षण करने पहुंचना था, सो अफसरों ने कांग्रेसियों के विरोध को दरकिनार कर बैनर हटा दिया। बैनर हटाते वक्त फट गया। इस पर कांग्रेसी मुख्य कर निर्धारण अधिकारी से उलझ पड़ी। दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। हाथापाई भी हुई। पुलिस फोर्स के पहुंचने पर मामला शांत हुआ।