दिल्ली में यमुना नदी के किनारे आयोजित होने जा रहे श्री श्री रवि शंकर के कार्यक्रम में एक और विवाद जुड़ गया है। इस नए विवाद में संस्कृति मंत्रालय से दिए गए अनुदान ने अहम भूमिका निभाई है। मंत्रालय ने इस आयोजन के लिए 2.5 करोड़ की धनराशि जारी की है जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। यह धनराशि बेंगलुरू स्थित व्यक्ति विकास संस्था के नाम से जारी किए गए हैं जो कि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर की ही संस्था है।
कांग्रेस ने मंत्रालय के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक कार्यक्रम के आयोजन के लिए इतनी बड़ी धनराशि कैसे दी जा सकती हैं? आज से पहले कभी भी इतनी बड़ी धनराशि का आवंटन नहीं हुआ है। कांग्रेस के मुताबिक मंत्रालय के कुल बजट ही 50 करोड़ का है ऐसे में केवल एक कार्यक्रम के लिए 2.5 करोड़ की धनराशि दिया जाना सही नहीं है।
कांग्रेस के इस विरोध पर संस्कृत मंत्री महेश शर्मा ने सफाई भी दी। शर्मा का कहना है कि ऐसा कोई प्रावधान हीं है जिसमें इस बात का जिक्र किया गया हो कि इतनी बड़ी धनराशि जारी नहीं की जा सकती। इससे पहले भी कई कार्यक्रमों के लिए बड़ी धनराशि का वितरण किया गया है।
वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल
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महेश शर्मा ने कहा, 'राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए मंत्रालय से धनराशि आवंटित करने का प्रावधान है। हमनें स्पिक मैके, विद्या भारती संस्कृति संस्थान और कई अन्य संस्थाओं को भी अनुदान दिए हैं।'
शर्मा ने कहा यह धनराशि के केवल वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के लिए नहीं दी गई। उन्होंने बताया, 'किसी भी कार्यक्रम के लिए 5 करोड़ रुपए तक देने का प्रावधान हैं लेकिन उन्होंने केवल 2.5 करोड़ रुपए ही दिए।' यह धनराशि दिसंबर के महीने में ही जारी की गई थी।
आर्ट ऑफ लिविंग के इस कार्यक्रम की तुलना एक अन्य कार्यक्रम से करते हुए पूर्व संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, 'एक बार हमने भी भारत के आजादी के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमेरिका में सात दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन कराया था। वह कार्यक्रम भी बहुत बड़ा था लेकिन उसमें भी कुछ लाख रुपए ही खर्च हुए थे। उसने एक करोड़ का भी आंकड़ा नहीं छुआ था।'