ये अपने आप में अनोखा संयोग है कि टी-20 में एशिया कप के एक दिन बाद ही वर्ल्ड कप (8 मार्च से) का आगाज हो रहा है, और इसके साथ ही क्रिकेट के फटाफट खेल में एशियाई चैंपियन मिलने के बाद अब एक नए वर्ल्ड चैंपियन के लिए जोर-आजमाइश शुरू हो जाएगी।
खिताब के दावेदारों की बात करें तो भारतीय उपमहाद्वीप से सिर्फ टीम इंडिया में ही चैंपियन बनने के गुर दिख रहे हैं। ओवरऑल देखा जाए तो छठी बार एशिया चैंपियन बनी भारत के अलावा दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड की टीम को भी खिताबी रेस में शामिल किया जा सकता है। अगर चौथी टीम की बात की जाए तो इंग्लैंड का नंबर आता है। वनडे में वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया जिस तरह से खेल रही है उसे दावेदारों में कतई नहीं रखा जा सकता।
कहने को तो इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली 16 टीमों में से सबसे ज्यादा 5 टीमें इन्हीं क्षेत्र से खेलेंगी जिसमें 4 टेस्ट क्रिकेट खेलने वाली टीमें भी हैं लेकिन भारत को छोड़ अन्य टीमें फाइनल में जगह बनाने की क्षमता तक नहीं रखतीं। टीम इंडिया के लिए यह साल बेहद गजब का दिख रहा है क्योंकि उसने 11 मैचों में 10 जीत हासिल की है। भारत की गेंदबाजी और बल्लेबाजी इस समय गजब का खेल दिखा रही हैं। विराट कोहली, रोहित शर्मा, युवराज सिंह और सुरेश रैना के साथ-साथ हार्दिक पांड्या, आशीष नेहरा, रविंद्र जडेजा और आर अश्विन जैसे सितारे टीम को दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बना सकते हैं।
भारत ने 2007 में शुरू हुए टी-20 वर्ल्ड कप के पहले संस्करण में खिताबी जीत हासिल की थी लेकिन उसके बाद से फिर कभी चैंपियन बनने का गौरव हासिल नहीं हुआ। हालांकि पिछली बार (2014) टीम इंडिया फाइनल में पहुंची थी, लेकिन वह उपविजेता रही थी।
'मिस्टर 360' के साथ 'चोकर्स' भी हैं दावेदारों में
केन विलियम्सन
भारत के अलावा केन विलियम्सन के रूप में नए कप्तान के साथ टी-20 वर्ल्ड कप में उतरने जा रही न्यूजीलैंड भी 3 प्रबल दावेदारों की टीम में शामिल है। टीम में इस समय कई बल्लेबाज ऐसे हैं जिन्होंने इस विधा में दमदार खेल दिखाया है। विलियम्सन के साथ-साथ मार्टिन गुप्टिल, कोरी एंडरसन, ल्युक रोंची और रॉस टेलर जैसे बड़े बल्लेबाज हैं जो किसी भी टीम की गेंदबाजों का लय तोड़ने में महारत रखते हैं। इनकी गेंदबाजी भी बढ़िया है, टिम साउदी, मिचेल स्टैनर और ट्रेंट बोल्ट के रूप में तेज गेंदबाजों की पेस बैटरी अच्छा खेल दिखा रही है। टीम ने इस साल खेले में 5 में से 4 मैचों में जीत हासिल की है।
भारत और न्यूजीलैंड के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका भी 3 सबसे बड़े दावेदारों में हैं। अफ्रीकी टीम को 'चोकर्स' के रूप में जाना जाता है और क्रिकेट में लगातार शानदार खेल दिखाने के बावजूद वह आज तक क्रिकेट में एक भी वर्ल्ड कप खिताब नहीं जीत पाई है। फिलहाल अफ्रीकी टीम ने टी-20 में इस साल जीत की हैट्रिक लगा ली है। इंग्लैंड को लगातार 2 मैचों में हराने के बाद उसने ऑस्ट्रेलिया को घरेलू टी-20 सीरीज के पहले मैच में हरा दिया है।
फैफ डु प्लेसिस की अगुवाई में दक्षिण अफ्रीका अपनी दावेदारी पेश करेगी। प्लेसिस के साथ-साथ टीम में एबी डीविलियर्स, कायली एबॉट, हाशिम अमला, क्विंटन डी कॉक, जीन पॉल डुमिनी जैसे धाकड़ बल्लेबाज हैं ही। 'मिस्टर 360' कहे जाने वाले अकेले डीविलियर्स ही अपनी बल्लेबाजी के दम पर मैच का नक्शा पलटने में माहिर हैं और वह किसी भी मैदान पर किसी भी परिस्थिति में दमदार बल्लेबाजी करते रहे हैं, खासकर भारतीय सरजमीं पर। वह यहां पर हर साल (आईपीएल) काफी क्रिकेट खेलते हैं और यहां की स्थिति के बारे में वाकिफ भी हैं।
गेंदबाजी में डेल स्टेन के तूफान के साथ-साथ कैगिसो रबादा, एरोन फैगियासो, क्रिस मॉरिस और इमरान ताहिर भी अपनी गेंदबाजी से विपक्षी टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ सकते हैं।
एशिया से सिर्फ टीम इंडिया ही दावेदार क्यों?
शाहिद अफरीदी
अब बात करते हैं कि महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली भारतीय टीम के अलावा एशिया से और कोई भी टीम चैंपियनशिप जीतने का माद्दा क्यों नहीं रखती?
वर्ल्ड कप से पहले एशिया कप टी-20 खेला गया और वह भी भारत के पड़ोस बांग्लादेश में, जहां के मैदान की परिस्थितियां यहां की जैसी ही थी। टूर्नामेंट के लिहाज से देखा जाए तो दो पूर्व चैंपियनों श्रीलंका और पाकिस्तान के लिए यह बेहद शर्मनाक रहा और इन दोनों ही टीमों को कमजोर कही जाने वाली मेजबान बांग्लादेश के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बांग्लादेश के साथ-साथ इन्हें टीम इंडिया से भी हार मिली।
वर्ल्ड कप से ठीक पहले जिस तरह से इन दोनों टीमों को हार का सामना करना पड़ा है उससे भारतीय उपमहाद्वीप से अब सिर्फ टीम इंडिया ही खिताब की प्रबल दावेदार रह गई है। गत चैंपियन श्रीलंका की हालत तो और खराब है उसे साल 2016 में खेले अपने 9 मैचों में 7 में हार का सामना करना पड़ा है। साल की शुरुआत में ही न्यूजीलैंड में लगातार 2 हार के बाद उसे भारत में 3 मैचों की टी-20 सीरीज के पहले मैच में जीत के बाद से उसे लगातार हार मिल रही है। सिर्फ एक जीत यूएई से मिली। टीम के कप्तान लसित मलिंगा चोटों से परेशान हैं तो उनकी बल्लेबाजों के प्रदर्शन में लगातार उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
वहीं पाकिस्तान की हालत भी श्रीलंका जैसी ही है। कप्तान शाहिद अफरीदी की अगुवाई में टीम की गेंदबाजी में पैनापन तो दिख रहा है लेकिन बल्लेबाज उसे आगे बनाए रखने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ये बल्लेबाज ही हैं जो गेंदबाजों के काम को बिगाड़कर रख दे रहे हैं। टीम इस साल 7 मैचों में से सिर्फ 3 में ही जीत हासिल कर सकी है। जिस तरह से टीम खेल रही है उससे नहीं लगता कि वर्ल्ड कप में उसकी राह आसान होगी। बांग्लादेश तो लाजवाब खेल के साथ एशिया कप में फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही लेकिन टी-20 के खेल में यह टीम सेमीफाइनल में पहुंच जाए तो भी बड़ी बात होगी।