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INC: राष्ट्रपति के भाषण में नेहरू का नाम न लिए जाने पर भड़की कांग्रेस, कहा- प्रथम PM का नाम मिटाने की कोशिश

Thu, 15 Aug 2024 11:04 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जयराम रमेश ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति के कल रात राष्ट्र के नाम संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन की कई प्रमुख हस्तियों का उल्लेख किया गया, जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री के नाम का उल्लेख नहीं किया गया था।
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जयराम रमेश - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर देश को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की मशहूर हस्तियों के बारे में बात की। अब इसी संबोधन पर कांग्रेस का गुस्सा भड़क गया है। सबसे पुरानी पार्टी ने राष्ट्रपति के संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन की मशहूर हस्तियों में जवाहरलाल नेहरू का नाम नहीं लिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही आरोप लगाया कि यह भारत के पहले प्रधानमंत्री को इतिहास से मिटाने के अभियान का हिस्सा है।

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15 अगस्त, 1947 को ऑल इंडिया रेडियो...
कांग्रेस महासचिव प्रभारी संचार जयराम रमेश ने याद किया कि 14 अगस्त, 1947 की आधी रात को जवाहरलाल नेहरू ने सेंट्रल हॉल में अपना अमर 'भाग्य से मुलाकात' भाषण दिया था। उन्होंने कहा, '15 अगस्त, 1947 को ऑल इंडिया रेडियो पर देश के नाम उनका संबोधन कम जाना जाता है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक था, जिसकी शुरुआत उन्होंने खुद को 'भारतीय जनता का पहला सेवक' बताते हुए की थी। राष्ट्र के नाम उनका संदेश 15 अगस्त 1947 की सुबह अखबारों में छपा था।'

क्या ही अद्भुत मंत्रिमंडल था
उन्होंने याद दिलाया कि इसी दिन 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इनमें नेहरू और सरदार पटेल के अलावा राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद, डॉ. अंबेडकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जगजीवन राम, राजकुमारी अमृत कौर, सरदार बलदेव सिंह, सीएच भाभा, जॉन मथाई, आरके शनमुखम चेट्टी, एनवी गाडगिल और रफी अहमद किदवई शामिल थे। चार हफ्ते से भी कम समय के बाद, केसी नियोगी और गोपालस्वामी अयंगर ने भी शपथ ली। उन्होंने कहा, 'यह कितना अद्भुत मंत्रिमंडल था, जो प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों से भरा हुआ था।'
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प्रथम पीएम का नाम इतिहास से मिटाने की कोशिश
रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति के कल रात राष्ट्र के नाम संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन की कई प्रमुख हस्तियों का उल्लेख किया गया, जबकि ब्रिटिश जेलों में 10 साल बिताने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री के नाम का उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से उन्हें हमारे इतिहास से मिटाने के अभियान का हिस्सा है।

अपने संबोधन में, मुर्मू ने कहा था कि सतह के नीचे जीवित रहने वाली विभिन्न परंपराओं और मूल्यों को महान नेताओं की कई पीढ़ियों में नई अभिव्यक्ति मिली। उन्होंने कहा था, 'परंपराओं और उनकी अभिव्यक्तियों की विविधता को एकजुट करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी थे, जो हमारे मार्गदर्शक थे। इसके साथ ही, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बाबासाहेब अंबेडकर के साथ-साथ भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और कई अन्य महान नेता भी थे।'



यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन था
उन्होंने कहा, 'यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन था, जिसमें सभी समुदायों ने भाग लिया। आदिवासियों में, तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, लक्ष्मण नाइक और फूल-झानो थे, जिनके बलिदानों की अब सराहना की जा रही है। हमने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया है। अगले साल उनकी 150वीं जयंती का जश्न राष्ट्रीय पुन: जागृति में उनके योगदान को और सम्मानित करने का अवसर होगा।'

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