पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत पांच अक्तूबर तक बढ़ा दी गई है। इससे पहले हल्दिया अदालत ने उन्हें तीन अक्तूबर तक हिरासत में भेजा था। 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े मामले में हुई इस कार्रवाई के बीच छह अक्तूबर को मतदान होना है और चार अक्तूबर को प्रचार खत्म होगा। हिरासत बढ़ने से मिलन के प्राचार पर क्या असर पड़ सकता है? आइए, विस्तार से सबकुछ जानते हैं...
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की मुश्किल बढ़ गई है। 2007 के एक पुराने मामले में उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई है। कांथी अदालत ने सोमवार को उन्हें पांच अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया। नंदीग्राम में छह अक्तूबर को मतदान होना है और चार अक्तूबर को चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अदालत के इस आदेश से मिलन प्रधान के चुनाव प्रचार पर सीधा असर पड़ेगा।
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मिलन प्रधान को पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी थाना क्षेत्र में 19 साल पहले दर्ज मामले के सिलसिले में अदालत में पेश किया गया था। कांथी अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले 19 सितंबर को गिरफ्तारी के एक दिन बाद हल्दिया की अदालत ने उन्हें तीन अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब कांथी अदालत के आदेश से उनकी हिरासत पांच अक्तूबर तक बढ़ गई है। उनके वकील अयन भट्टाचार्य ने कहा है कि इस आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत दो दिन और क्यों बढ़ी?
मिलन प्रधान के खिलाफ मामला 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम का है। यह मामला खेजुरी थाने में दर्ज किया गया था। उन्हें इसी मामले में दर्ज आरोपों के सिलसिले में अदालत के सामने पेश किया गया। उनके खिलाफ हत्या समेत कई आरोपों से जुड़े पुराने मामले होने की बात कही गई है।
सोमवार को कांथी अदालत ने उन्हें पांच अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इससे पहले हल्दिया अदालत ने 19 सितंबर को उनकी गिरफ्तारी के बाद तीन अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत का आदेश दिया था। अब उनकी हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ गई है।
न्यायिक हिरासत का चुनाव प्रचार पर क्या असर पड़ेगा?
मिलन प्रधान नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। इस सीट पर छह अक्तूबर को मतदान होना है, जबकि चुनाव प्रचार चार अक्तूबर को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में पांच अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में रहने के कारण मिलन प्रधान के पास चुनाव प्रचार के लिए मैदान में मौजूद रहने का अवसर नहीं रहेगा। अदालत का आदेश उनके लिए ऐसे समय आया है, जब उपचुनाव की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। उनके वकील ने आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
नंदीग्राम सीट खाली कैसे हुई और उपचुनाव क्यों हो रहा है?
नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। शुभेंदु अधिकारी ने मई में नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्होंने भबानीपुर सीट बरकरार रखने का फैसला किया। इसी वजह से नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। कांग्रेस ने इस चुनाव में मिलन प्रधान को अपना उम्मीदवार बनाया है। अब मतदान से कुछ दिन पहले उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ने से उनके चुनाव प्रचार की स्थिति बदल गई है।
अब नंदीग्राम उपचुनाव में आगे क्या होगा?
नंदीग्राम में छह अक्तूबर को मतदान होना है और उससे पहले चार अक्तूबर को प्रचार समाप्त हो जाएगा। मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत पांच अक्तूबर तक है। ऐसे में मौजूदा अदालत के आदेश के अनुसार वह प्रचार के अंतिम दिन से पहले ही जेल में रहेंगे। उनके वकील ने आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। इसलिए अब इस मामले में अगला अहम घटनाक्रम हाईकोर्ट में होने वाली कानूनी कार्रवाई होगी। फिलहाल अदालत के आदेश के कारण कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार का चुनाव प्रचार प्रभावित हुआ है।