परिसीमन मुद्दे पर बढ़ते गर्माहट के बीच आज चेन्नई में संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की पहली बैठक हुई। इस बैठक में इस बैठक में केंद्र सरकार के परिसीमन दृष्टिकोण में पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को परिसीमन मुद्दे पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने कहा कि इस मुद्दे पर विभिन्न हितधारकों के बीच बहुत अधिक बातचीत होनी चाहिए और इसके लिए कई महत्वपूर्ण चर्चाओं की जरूरत है।
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बता दें कि परिसीमन मामले में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की पहली बैठक शनिवार को चेन्नई में हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार के परिसीमन दृष्टिकोण में पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही एक प्रस्ताव पारित किया गया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा शुरू की गई इस बैठक में विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों और कई नेताओं ने भाग लिया।
डीएमके सांसद कोनिमोझी ने दी जानकारी
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की सांसद कनिमोझी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जेएसी ने परिसीमन प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी के बारे में गहरी चिंता जताई है, खासकर क्योंकि यह बिना किसी व्यापक परामर्श के किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि परिसीमन का अभ्यास पारदर्शी तरीके से किया जाए, ताकि सभी राज्यों के राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों को विचार-विमर्श में शामिल किया जा सके।
कोनिमोझी ने संविधान संशोधन के उद्देश्य का किया जिक्र
कनिमोझी ने यह भी कहा कि 42वें, 84वें और 87वें संविधान संशोधन का उद्देश्य उन राज्यों की रक्षा करना था जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया है, और यह मांग की कि 1971 की जनगणना के आधार पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों पर रोक को और 25 साल के लिए बढ़ाया जाए। साथ ही बैठत में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घोषणा की कि परिसीमन पर अगली बैठक हैदराबाद, तेलंगाना में होगी। इस बैठक में कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, केरल और ओडिशा जैसे राज्यों के प्रमुख नेताओं ने भी भाग लिया।