केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में एक कांग्रेस नेता के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कांग्रेस से माफी मांगने की बात कही। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राज्यसभा के बाहर की गई टिप्पणी पर यहां चर्चा नहीं की जा सकती। इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि किसी सांसद के बयान पर सदन में चर्चा नियमों का उल्लंघन नहीं है। चर्चा की जा सकती है। कांग्रेस सांसद के बयान को अपमानजनक और भड़काऊ बताते हुए राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने कांग्रेस की विचारधारा को विभाजनकारी करार दिया।
कर्नाटक के कांग्रेस सांसद की टिप्पणी से उपजा विवाद
दरअसल, पूरा विवाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई के बयान से जुड़ा है। राजधानी की बंगलूरू ग्रामीण लोकसभा सीट से निर्वाचित कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने संसद में अंतरिम बजट 2024 पेश होने के बाद कहा, दक्षिण भारत के साथ नाइंसाफी होती है। उन्होंने कथित 'राजकोषीय अन्याय' का जिक्र करते हुए एक अलग दक्षिण राष्ट्र बनाने का आह्वान भी कर डाला। इस विवादित बयान के बाद गोयल ने राज्यसभा में कहा कि देश को बांटने की सोच को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि एकजुट राष्ट्र ऐसे किसी भी आह्वान को बर्दाश्त नहीं करेगा।
माफी मांगने की बात पर खरगे ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद की टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग पर गोयल के बाद खरगे ने भी बयान दिया। उन्होंने कहा, 'हम देश को तोड़ने वाले किसी भी बयान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह बयान किसी भी पार्टी का हो...चाहे वह मेरी पार्टी का हो या उनकी (भाजपा) पार्टी का, या किसी और का। कोई कहे या न कहे, मैं मल्लिकार्जुन खड़गे यही कहूंगा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत एक है और एक रहेगा।' खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्रियों के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि देश को एकजुट रखने के मकसद के लिए ही इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया।
बयान गलत तरीके से दिखाने का आरोप; लोकसभा की समिति के पास जाए मामला
खरगे ने सुरेश के बचाव में कहा, उनके पार्टी के लोकसभा सांसद ने टीवी पर स्पष्टीकरण दिया है कि उन्होंने वैसा कभी नहीं कहा, जो टीवी पर बताया जा रहा है। खरगे ने कहा, 'अगर उन्होंने कुछ आपत्तिजनक कहा भी है तो इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को देखना चाहिए। खरगे ने सवाल किया, क्या ऐसी पार्टी देश को तोड़ने की बात कर सकती है? उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी ऐसी बात बर्दाश्त नहीं करेगी। जो बात डीके सुरेश ने कही भी नहीं, उन्हें सदन में दोहराना ठीक नहीं है।
संविधान पर हमला, देश की संप्रभुता और अखंडता का अपमान
इससे पहले गोयल ने शुक्रवार सुबह 11 बजे राज्यसभा की बैठक शुरू होने पर डीके सुरेश के बयान से जुड़ा मुद्दा उठाया। गोयल ने कहा कि डीके सुरेश का ताजा बयान पार्टी की विभाजनकारी सोच का उदाहरण है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री गोयल ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए भी भारत के संविधान की शपथ जरूरी है। उन्होंने कहा, निर्वाचित होने के बाद सांसदों को संविधान के प्रति निष्ठा और देश की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखने की शपथ लेनी होती है। उन्होंने सुरेश का नाम लिए बिना कहा कि इस बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह भारत के संविधान पर हमला होने के साथ-साथ देश की संप्रभुता और अखंडता का अपमान है।
भाजपा ने देश को बांटने की साजिश का आरोप लगाया
उन्होंने कहा, यह बयान उस दिन दिया गया जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में अंतरिम बजट पेश कर रही थीं। गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट 2047 तक विकसित भारत का रोडमैप पेश करता है। जबकि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई का बयान कांग्रेस पार्टी की 'विभाजनकारी' सोच को दिखाता है। गोयल का आरोप है कि कांग्रेस ने अतीत में भी देश को बांटा है।
डीके सुरेश ने क्या कहा? दक्षिण से टैक्स लेकर उत्तर में बांटने का आरोप
गौरतलब है कि डीके सुरेश ने कथित तौर पर कहा था कि दक्षिण भारतीय राज्यों को केंद्र से उनका वाजिब बकाया नहीं मिल रहा है। इन राज्यों से वसूला जा रहा टैक्स उत्तर में वितरित किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद सुरेश ने कथित तौर पर कहा कि अगर यह नाइंसाफी बंद नहीं हुई तो दक्षिणी राज्य एक अलग राष्ट्र की मांग करने पर मजबूर हो जाएंगे।