पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्षी दलों का साथ आना जरूरी है, लेकिन केवल मोदी विरोधी एजेंडा के बल पर यह विपक्षी मोर्चा सफल नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में विपक्षी दलों को इस बहस में नहीं पड़ना चाहिए कि विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार के अनुसार मोइली ने कहा, 'उन्हें (विपक्षी दलों को) अब नेतृत्व की चिंता नहीं करनी चाहिए।'
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री मोइली ने कहा कि अगर वह इस बात पर बहस करने लगेंगे कि कौन विपक्षी मोर्चे का नेता होगा और कौन सी पार्टी इसकी अगुवाई करेगा, यह सफल नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी की कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बुधवार को हुई मुलाकात का स्वागत किया। उन्होंने ममता के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों से साथ आने की अपील की थी।
इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए विपक्षी दलों के एजेंडा के बारे में बात करते हुए मोइली ने कहा यही वह (तत्कालीन विपक्षी दल) किया करते थे। वे सफल नहीं हो पाए। मोइली ने कहा कि विपक्ष का एजेंडा निजी मुद्दों पर आधारित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, यह विचारधारा के मुद्दों पर आधारित होना चाहिए। इस बात पर बात होनी चाहिए कि देश को आगे कैसे ले जाएं। विपक्षी दल एक साथ आएं और उनमें एक समझ होनी चाहिए। अन्यथा जनता हम पर भरोसा नहीं करेगी।