प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चंद्रमा पर लैंडर विक्रम के उतरने वाले स्थल का नाम शिवशक्ति रखने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, पीएम ने शिवशक्ति नाम कैसे रख दिया, क्या वह चांद के मालिक हैं।
एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान अल्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री को किसने ये हक दिया कि वो चांद पर जगह का नाम रखें। जब अल्वी से पूछा गया कि 2008 में कांग्रेस सरकार में चंद्रयान-1 के प्रोब को चांद पर गिराया गया था, तब उस जगह का नामकरण देश के पहले पीएम और जवाहरलाल नेहरू के नाम पर क्यों रखा? इस पर अल्वी ने कहा, पहले पीएम नेहरू ने विक्रम साराभाई के साथ मिलकर इसरो की स्थापना की थी। नेहरू की तुलना किसी और नाम से नहीं की जा सकती।
अल्वी के बयान के बाद भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पलटवार किया। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, चंद्रयान-1 के लैंडिंग स्थल का नाम जवाहर प्वाइंट रखने वाली कांग्रेस ने फिर हिंदुओं की आस्था का अपमान किया है। आखिर कांग्रेस को हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट में लिखा, ये भारत बनाम परिवार पहले का मामला है। पीएम मोदी देश को पहले रखते हैं जबकि यूपीए परिवार को। यूपीए सरकार में चंद्रयान-1 ने चांद की जिस सतह की जांच की थी उसका नाम जवाहर प्वाइंट रखा। अगर यूपीए सरकार होती तो चंद्रयान-2 और 3 को भेजती ही नहीं, अगर भेजती भी तो उनका नाम इंदिरा प्वाइंट और राजीव प्वाइंट रखती।
सफलता याद दिलाएगा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के तौर पर मनाने के लिए की गई घोषणा का समर्थन करते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को चंद्र अभियान से जुड़ी भारत की सफलता की याद रहेगी और वैज्ञानिकों को नई ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी। शाह ने कहा कि एक सच्चा नेता हर परिस्थिति में अपने लोगों के साथ खड़ा रहता है, और यह तब परिलक्षित हुआ, जब प्रधानमंत्री चंद्रयान-3 मिशन में शामिल इसरो के वैज्ञानिकों से मिलने के लिए आज सुबह ग्रीस से सीधे बंगलूरू पहुंचे। शाह ने कहा कि 23 अगस्त भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि यह उसके चंद्रयान-3 अभियान की उपलब्धि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत के चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता से देश के वैज्ञानिकों ने एक अमिट छाप छोड़ी है। इस उपलब्धि का उत्सव मनाने के लिए प्रधानमंत्री ने चंद्रयान-3 के लैंडिंग स्थल का नाम शिवशक्ति रखा और जिस स्थान पर चंद्रयान-2 गिरा था, उसे तिरंगा नाम दिया।